नई दिल्ली, 30 जून।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर बनने वाले प्रमुख पुलों की सुरक्षा, गुणवत्ता और दीर्घकालिक स्थायित्व को मजबूत करने के लिए नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत सभी नई परियोजनाओं में प्रमुख पुलों के हाइड्रोलिक अध्ययन और डिजाइन की स्वतंत्र तकनीकी जांच के लिए आईआईटी तथा अन्य प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों को सूचीबद्ध किया जाएगा।
एनएचएआई के अनुसार आईआईटी दिल्ली, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी रुड़की और आईआईटी खड़गपुर सहित लगभग 12 आईआईटी तथा कई प्रमुख तकनीकी संस्थानों ने इस पहल में सहयोग की इच्छा जताई है। इसका उद्देश्य निर्माण शुरू होने से पहले 100 वर्ष या उससे अधिक की संभावित सेवा अवधि को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए प्रमुख पुलों के डिजाइन की निष्पक्ष और गहन तकनीकी समीक्षा सुनिश्चित करना है।
नई व्यवस्था के तहत पुलों के संरचनात्मक डिजाइन की गणनाओं, इंजीनियरिंग ड्रॉइंग, निर्माण पद्धति, भू-तकनीकी जांच और हाइड्रोलिक अध्ययनों का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा। इससे परियोजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकेगा।
प्राधिकरण ने बताया कि यह व्यवस्था पुल निर्माण से जुड़ी सभी परियोजना कार्यान्वयन प्रणालियों पर समान रूप से लागू होगी। इससे विभिन्न परियोजना मॉडल में गुणवत्ता की एक समान और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
एनएचएआई का मानना है कि इस पहल से संरचनात्मक सुरक्षा और डिजाइन की विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार होगा। साथ ही लंबे समय में परिचालन संबंधी जोखिम भी कम होंगे। यह कदम सुरक्षित, उच्च गुणवत्ता वाले और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के विकास के उद्देश्य को भी मजबूती प्रदान करेगा।
















