राजनीति
30 Jun, 2026

उत्तराखंड में एक जुलाई से मदरसा बोर्ड की जगह शिक्षा प्राधिकरण लेगा

उत्तराखंड में एक जुलाई से मदरसा बोर्ड की जगह अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण कार्यभार संभालेगा, जिसके तहत 452 पंजीकृत मदरसों सहित सभी अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को नई नियमावली के अनुसार मान्यता लेनी होगी।

देहरादून, 30 जून।

उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड का मंगलवार को अंतिम कार्य दिवस रहा। अब एक जुलाई से इसकी जगह उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण कार्यभार संभालेगा। नई व्यवस्था के तहत राज्य के 452 पंजीकृत मदरसों सहित सभी अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को निर्धारित नियमावली के अनुरूप नई मान्यता प्राप्त करनी होगी।

राज्य सरकार के अनुसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने 14 मई को उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान मान्यता नियमावली-2026 को मंजूरी दी थी। इसके तहत मदरसा बोर्ड को समाप्त कर नए प्राधिकरण का गठन किया गया है। अब मदरसों को पहले उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से संबद्धता लेनी होगी और इसके बाद प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त करनी होगी। प्रत्येक मान्यता तीन शैक्षणिक वर्षों तक वैध रहेगी। आवश्यक होने पर प्राधिकरण संस्थानों का निरीक्षण भी करेगा और नियमों के उल्लंघन पर सुनवाई के बाद मान्यता निरस्त कर सकेगा।

नई नियमावली में मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदायों को अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में शामिल किया गया है। संस्थानों को निर्धारित सरकारी पोर्टल पर आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज और शुल्क जमा करना होगा। आवेदन के दौरान अल्पसंख्यक पहचान, भूमि स्वामित्व, वित्तीय स्थिति, स्टाफ की योग्यता और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने से जुड़े पहलुओं की जांच की जाएगी।

पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बनने से शैक्षणिक संस्थानों के संचालन में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित होगी। समाज कल्याण एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास ने कहा कि 452 पंजीकृत मदरसों को नई व्यवस्था में शामिल करना शिक्षा सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि 30 जून के बाद मदरसा बोर्ड का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और एक जुलाई से नया प्राधिकरण मान्यता संबंधी सभी कार्य करेगा। उनके अनुसार इस तरह की व्यवस्था लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य होगा। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना और अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप संचालित करना है।

उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था में विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ धार्मिक शिक्षा भी उपलब्ध कराई जाएगी। मान्यता केवल निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों को ही दी जाएगी। बुधवार को नवगठित अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण नौ अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों, जिनमें एक जैन, एक सिख और सात मदरसे शामिल हैं, को मान्यता प्रदान करेगा।

मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष शमीम काजमी ने सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि एक जुलाई से सभी मदरसे नए प्राधिकरण के अधीन आ जाएंगे। उन्होंने कहा कि नए प्रावधानों के तहत शिक्षा विभाग द्वारा स्वीकृत पाठ्यक्रम लागू होने से विद्यार्थियों को मान्यता प्राप्त डिग्री के साथ धार्मिक शिक्षा का भी लाभ मिलेगा। वहीं उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा कि नई व्यवस्था से आधुनिक और धार्मिक शिक्षा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा तथा एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम से विद्यार्थियों को मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

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