नई दिल्ली, 3 जुलाई।
भारत के प्रधानमंत्री और जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ के हर स्वरूप की कड़ी निंदा की है। दोनों नेताओं ने पाकिस्तान की ओर से होने वाले सीमा पार आतंकवाद पर विशेष रूप से प्रहार किया।
सोलहवें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान जारी साझा बयान में दोनों देशों ने पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर गहरा आक्रोश जताया। साथ ही, 29 जुलाई 2025 की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट और 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' के संदर्भ को भी उन्होंने रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री ताकाइची ने पिछले साल 10 नवंबर को दिल्ली में हुए आतंकवादी हमले की भी घोर निंदा की। दोनों नेताओं ने इस घटना के दोषियों, आयोजकों और आर्थिक मदद देने वालों को बिना देरी किए सजा दिलाने की मांग की।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित अल-कायदा, आईएसआईएस, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और उनके गुर्गों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने पर दोनों प्रधानमंत्रियों ने जोर दिया। उन्होंने आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने और उनकी फंडिंग को रोकने के लिए संकल्प दोहराया।
भारत और जापान ने एक सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण के लिए समान विचारधारा वाले देशों के साथ मिलकर काम करने पर सहमति जताई। क्वाड ढांचे के तहत जारी प्रगति का स्वागत करते हुए उन्होंने समुद्री सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात कही।
दोनों नेताओं ने भविष्य में क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और मानवीय सहायता के मोर्चे पर मिलकर काम करने की महत्ता को साझा किया। साथ ही, आसियान देशों के साथ मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता और शांति को मजबूत करने पर भी विशेष बल दिया।














