नई दिल्ली, 04 जुलाई।
फर्जी वेबसाइटों की लगाम कसने के लिए भारत सरकार की सख्ती के बाद अब गोडैडी ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। कंपनी ने अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें ऑनलाइन फ्रॉड रोकने के लिए कड़े निर्देश दिए गए थे।
मामला पिछले साल दिसंबर का है, जब कोर्ट ने अमेज़न और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियों की शिकायतों पर 1,100 से अधिक फर्जी वेबसाइटों को ब्लॉक करने का आदेश दिया था। साथ ही डोमेन रजिस्ट्रेशन नियमों को सख्त करने को कहा गया था।
अदालत के आदेशानुसार, अब कंपनियों को डिफॉल्ट रूप से मुफ्त प्राइवेसी सुरक्षा नहीं देनी होगी। साथ ही किसी भी डोमेन मालिक की जानकारी 72 घंटे के भीतर वैध आवेदकों को साझा करनी होगी और प्रसिद्ध ब्रांड के नाम से मिलते-जुलते डोमेन पर रोक लगानी होगी।
गोडैडी का तर्क है कि इससे इंटरनेट यूजर्स की निजता खतरे में पड़ जाएगी। कंपनी के अनुसार, नाम और फोन नंबर जैसी निजी जानकारियां सार्वजनिक होने से ग्राहकों को साइबर हमलों और उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है।
कंपनी ने यह भी कहा कि "वैध हित" की स्पष्ट परिभाषा न होने से जानकारी साझा करने में दिक्कत आएगी। गोडैडी के मुताबिक, ये नियम डेटा संरक्षण कानूनों के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं हैं और इससे भारत में व्यापार सीमित हो सकता है।
दूसरी तरफ, केंद्र सरकार का पक्ष साफ है। गृह मंत्रालय ने अदालत में स्पष्ट किया है कि डोमेन के गलत इस्तेमाल से देश में साइबर अपराध बढ़ रहे हैं। जांच एजेंसियों के लिए पंजीकरण संबंधी जानकारी का मिलना सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी है।













