नई दिल्ली, 04 जुलाई।
संसद के आगामी मानसून सत्र को लेकर कांग्रेस ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह विदेश नीति, चुनाव आयोग की भूमिका और राममंदिर चंदा विवाद जैसे गंभीर विषयों पर सरकार को घेरेगी। कांग्रेस नेता ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर उठते सवाल चिंताजनक हैं।
उन्होंने बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर आरोप लगाए। विपक्षी दलों ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं और इस मामले में उच्चतम न्यायालय से हस्तक्षेप की उम्मीद जताई है।
परिसीमन के मुद्दे पर पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार का असल मकसद संविधान बदलना है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सामाजिक न्याय और आरक्षण जैसे विषयों से भागने के लिए इन एजेंडों का इस्तेमाल कर रही है।
राममंदिर के अलावा केदारनाथ और बदरीनाथ में भी दान के पैसे में हेरफेर का मुद्दा उठाने की बात कही गई है। कांग्रेस ने मांग की है कि इन कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
विदेश नीति के मोर्चे पर सरकार को नाकाम बताते हुए कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को झटके लग रहे हैं। चीन और अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौतों पर संसद में चर्चा न होना सरकार की चुप्पी को दर्शाता है।














