जोधपुर, 04 जुलाई।
बहुचर्चित एएनएम भंवरी देवी हत्याकांड के 15 साल बाद भी उनके वारिसों को पेंशन का लाभ नहीं मिल सका है। इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने अब सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका पर सुनवाई की है।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि यदि 18 जुलाई तक पेंशन परिलाभों का भुगतान नहीं किया गया, तो चिकित्सा सचिव गायत्री राठौड़, जोधपुर सीएमएचओ डॉ. सुरेन्द्र सिंह शेखावत, निदेशक राकेश कुमार शर्मा और पेंशन विभाग के अधिकारियों को 21 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होना होगा।
याचिकाकर्ता साहिल पेमावत और उनकी बहनों का आरोप है कि अदालत के स्पष्ट निर्देशों के ढाई साल बाद भी विभाग की ओर से लापरवाही बरती जा रही है। विभाग का कहना है कि मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं होने के कारण वे कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।
गौरतलब है कि पूर्व में चिकित्सा विभाग खुद भंवरी देवी को मृत मानकर अनुकंपा नियुक्ति भी दे चुका है। इसके बावजूद पेंशन विभाग और स्थानीय सीएमएचओ कार्यालय की ओर से फाइल को अटकाए रखा गया है।
न्यायाधीश अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साफ कर दिया है कि समय सीमा के भीतर आदेश की पालना न होने पर संबंधित अधिकारियों को अदालत का सामना करना पड़ेगा।














