कोलकाता, 04 जुलाई।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोलकाता की एक आईटी फर्म वीआरएम बिजनेस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पर बड़ा शिकंजा कसा है। कंपनी और उसके निदेशक राजेश गोयनका के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत आरोपपत्र दाखिल किया गया है।
आरोप है कि यह कंपनी अवैध कॉल सेंटर चलाकर विदेशी नागरिकों को निशाना बनाती थी। प्रतिष्ठित कंपनियों का प्रतिनिधि बनकर ये लोग ग्राहकों को डरा-धमकाकर उनसे करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करते थे।
एजेंसी ने इस मामले में पूर्व में 2.35 करोड़ की चल संपत्ति और 11.14 करोड़ की अचल संपत्ति कुर्क की है। जांच में खुलासा हुआ कि इन लोगों ने ठगी से 20.35 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की थी।
आरोपितों ने इस काली कमाई का इस्तेमाल आभूषण खरीदने और अचल संपत्तियां बनाने में किया। राजेश गोयनका और उनकी कंपनी इस पूरे अपराध के मुख्य लाभार्थी पाए गए हैं।
यह अवैध नेटवर्क इंटरनेट आधारित सेवाओं के जरिए विदेशी ग्राहकों को झांसा देता था। तकनीकी सहायता या सदस्यता समाप्त करने के नाम पर लोगों से अवैध वसूली की जाती थी, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ।














