मीरजापुर, 04 जुलाई।
जिले के जिगना क्षेत्र अंतर्गत नरोइयां गांव में शनिवार को आपदा प्रबंधन पर एक महत्वपूर्ण जागरूकता बैठक संपन्न हुई। पंचायत भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों को प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से प्रशिक्षित किया गया। इस दौरान पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए ग्रामीणों ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को जन-आंदोलन बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।
ग्राम सचिव अभिषेक पाराशर ने मानसून के दौरान सुरक्षा के गुर सिखाते हुए कहा कि महुआ या बरगद जैसे विशाल वृक्षों के नीचे आश्रय लेना खतरनाक हो सकता है। उन्होंने सलाह दी कि खेतों में काम करते समय यदि आकाशीय बिजली चमकने लगे, तो तुरंत नीचे झुककर बैठ जाना ही बचाव का सर्वोत्तम तरीका है। इसके साथ ही, उन्होंने किसी भी स्थिति में अंधविश्वास या झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ने के बजाय सर्पदंश पर सीधे सरकारी अस्पताल पहुंचने की अपील की।
प्रशासक अशोक बिंद ने पर्यावरण असंतुलन की चिंता जताते हुए कहा कि हमें आने वाली पीढ़ी के लिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना होगा। उन्होंने घोषणा की कि गांव में जो व्यक्ति सबसे अधिक पौधे लगाएगा, उसे विशेष रूप से पुरस्कृत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, बैठक में संचारी रोगों से निपटने के लिए स्वच्छता के साथ-साथ प्लास्टिक के प्रयोग को पूरी तरह समाप्त करने और कपड़े के थैलों को अपनाने पर बल दिया गया।














