ढाका, 10 जुलाई।
बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि वह इस वर्ष दिसंबर के आसपास भारत में अपना निर्वासन समाप्त कर वरिष्ठ पार्टी नेताओं के साथ स्वदेश लौटेंगी और अदालत में आत्मसमर्पण करेंगी। उनके विरुद्ध बांग्लादेश में मृत्युदंड का फैसला सुनाया जा चुका है तथा उनकी पार्टी पर प्रतिबंध भी लागू है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि वह स्वयं लौटकर न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना चाहती हैं।
करीब दो वर्ष पहले देश छोड़ने के लिए विवश हुईं शेख हसीना ने कहा कि उनकी पार्टी अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी उनके साथ अदालत में पेश होने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि वापसी के बाद उन्हें गिरफ्तार किया जाता है या उनकी हत्या भी हो जाती है, तब भी वह अपने देश लौटेंगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता लगातार दमन झेल रहे हैं और यदि मृत्यु भी आए तो वह उसी धरती पर आए, जहां उनके माता-पिता दफन हैं और जहां उनका रक्त बहा था।
वर्ष 2024 में छात्र आंदोलन के बाद सत्ता से हटने के पश्चात वह भारत आ गई थीं। बाद में बांग्लादेश के युद्ध अपराध न्यायाधिकरण ने छात्र आंदोलन पर कथित कठोर कार्रवाई के मामले में अनुपस्थिति में उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई। शेख हसीना लगातार इन आरोपों को अस्वीकार करती रही हैं।
उनकी संभावित वापसी को बांग्लादेश की राजनीति में नए तनाव के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर ढाका की सरकार दो वर्षों की राजनीतिक उथल-पुथल के बाद हालात सामान्य करने का प्रयास कर रही है, दूसरी ओर उनकी वापसी का प्रभाव भारत और बांग्लादेश के संबंधों पर भी पड़ सकता है। भारत द्वारा उन्हें शरण दिए जाने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा था और बांग्लादेश लगातार उनके प्रत्यर्पण की मांग करता रहा है।
निर्वासन के दौरान पहली बार उन्होंने अपनी वापसी की समय-सीमा सार्वजनिक करते हुए कहा कि इस विषय पर उन्होंने किसी भी विदेशी सरकार से कोई बातचीत नहीं की है। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश की ओर से उन्हें वापस भेजने के लिए भारत को लगातार पत्र भेजे जा रहे हैं, लेकिन वह अपने निर्णय के आधार पर ही लौटेंगी।
उन्होंने कहा कि उन्हें अदालत की कार्यवाही का कोई भय नहीं है और उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। उनका कहना है कि जैसे ही सुनवाई शुरू होगी, लोगों के सामने अदालत की प्रक्रिया की निष्पक्षता स्पष्ट हो जाएगी और वह स्वयं इसे साबित करना चाहती हैं।
शेख हसीना ने आरोप लगाया कि उनकी सरकार गिरने के बाद अवामी लीग के अधिकांश नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं तथा अनेक लोग छिपकर रहने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने पार्टी नेताओं से कहा है कि इस बार सभी लोग एक साथ देश लौटें और अदालत में आत्मसमर्पण करें। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि वह किस दिन लौटेंगी और किस अदालत में पेश होंगी।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र, मतदान का अधिकार, अवामी लीग के राजनीतिक अधिकार और न्याय जैसे विषय किसी भी गुप्त बातचीत का हिस्सा नहीं हो सकते। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपनी वापसी की योजना को लेकर उन्होंने ढाका सरकार से कोई संपर्क नहीं किया है।
जेल जाने की संभावना पर उन्होंने कहा कि इससे उन्हें कोई चिंता नहीं है, क्योंकि पहले भी उन्हें कई बार गिरफ्तार किया जा चुका है। अपने पिता और परिवार की हत्या के बाद वर्ष 1971 में निर्वासन से लौटने के उपरांत सैन्य शासन के खिलाफ आंदोलनों के दौरान उन्हें कई बार हिरासत में लिया गया था। वर्ष 2009 में सैन्य समर्थित कार्यवाहक सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोपों में भी उन्हें जेल भेजा था, लेकिन बाद में वह रिहा हुईं और वर्ष 2009 का चुनाव जीतकर दोबारा सत्ता में लौटीं।
उन्होंने कहा कि इस बार उन्हें अपना निवास इसलिए छोड़ना पड़ा, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग उनके आवास की ओर बढ़ रहे थे और उनकी जान को खतरा था।
लंबे समय तक सत्ता में रहने को लेकर उन्होंने कहा कि कोई भी सरकार लंबे समय तक काम करती है तो उससे गलतियां हो सकती हैं। उनके अनुसार किसी भी सरकार से त्रुटियां होना असामान्य नहीं है, लेकिन यह तय करने का अधिकार जनता के पास है कि सरकार ने अच्छा काम किया या बुरा। उन्होंने कहा कि वह इस निर्णय को जनता पर छोड़ती हैं।
शेख हसीना ने बताया कि निर्वासन के दौरान उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से बांग्लादेश की 300 संसदीय सीटों में से 125 क्षेत्रों के नेताओं के साथ बैठकें की हैं और पार्टी के पुनर्गठन का प्रयास लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि भले ही उन्हें चुनाव लड़ने का अवसर न मिले, लेकिन अवामी लीग को निलंबित करने का कोई औचित्य नहीं है। यदि उनकी पार्टी ने कोई गलत कार्य किया है तो उसका निर्णय भी जनता को ही करना चाहिए।












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