जिले में पदस्थ रहे साहब, जो अब कहीं और पदस्थ हैं, उनकी जिले से जुड़ी कुछ डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है। शुरू-शुरू में तो जिम्मेदारी मानकर सहयोगी स्टाफ साहब की फरमाइशें पूरी कर रहे थे, लेकिन अब फरमाइशें बोझ लगने लगी हैं।
लेकिन करें तो क्या करें, सीआर साहब की टेबल पर है।











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