शिमला, 10 जुलाई।
हिमाचल प्रदेश में मॉनसून के सक्रिय होने के बाद पहली बार मूसलाधार भारी बारिश का दौर देखा गया है। बीती रात से हो रही अनवरत वर्षा ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। सिरमौर जिले के पच्छाद में 207 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो इस सत्र का सबसे उच्चतम स्तर है। इसके अलावा नाहन, कसौली, धर्मपुर और पालमपुर जैसे क्षेत्रों में भी रिकॉर्ड तोड़ पानी बरसा है।
इस जलप्रलय के कारण सड़कों का जाल बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अकेले शिमला जिले में 27 सड़कें भूस्खलन की भेंट चढ़ गई हैं, वहीं 67 बिजली ट्रांसफार्मर ठप होने से कई क्षेत्र अंधेरे में डूब गए हैं। पेयजल की 53 योजनाएं भी बुरी तरह बाधित हुई हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर ठियोग और रामपुर उपमंडल सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर सिरमौर और सोलन में सभी शिक्षण संस्थानों में आज अवकाश घोषित कर दिया है। गिरि नदी का जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंचने के बाद जटोंन बांध के गेट खोले गए हैं, जिससे निचले इलाकों के लिए चेतावनी जारी की गई है। मंडी-मनाली मार्ग पर चट्टानें गिरने के कारण भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।
शिमला के विकासनगर में दीवार ढहने से वाहनों को नुकसान पहुँचा है, हालांकि गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई। मौसम विभाग ने आगामी 15 जुलाई तक येलो अलर्ट जारी करते हुए लोगों को नदी-नालों के पास न जाने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सख्त हिदायत दी है।











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