मध्य प्रदेश
10 Jul, 2026

मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधार के लिए महिला-बाल विकास विभाग और एम्स में होगी साझेदारी

मध्य प्रदेश में मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग और एम्स भोपाल के बीच एमओयू होगा, जिससे फ्रंटलाइन वर्कर्स को विशेषज्ञ प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग मिलेगा।

भोपाल, 10 जुलाई।

मध्य प्रदेश में जनजातीय क्षेत्रों से लेकर दूरस्थ गांवों तक मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में महिला एवं बाल विकास विभाग और एम्स भोपाल के बीच जल्द एमओयू किया जाएगा। इस साझेदारी के माध्यम से एम्स की तकनीकी विशेषज्ञता और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ सीधे फ्रंटलाइन वर्कर्स तक पहुंचेगा।

महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने गुरुवार को मंत्रालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में इस साझेदारी को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को गंभीर कुपोषण की सटीक पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा विशेष क्लीनिकल प्रशिक्षण दिया जाएगा।

मंत्री भूरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बच्चों और महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य तथा संपूर्ण पोषण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि एम्स भोपाल की तकनीकी विशेषज्ञता से फ्रंटलाइन वर्कर्स और आंगनवाड़ी केंद्रों की कार्यक्षमता मजबूत होगी, जिससे नीतिगत स्तर पर सटीक और डेटा आधारित निर्णय लेने में मदद मिलेगी। यह एमओयू महिला एवं बाल विकास विभाग तथा एम्स भोपाल के कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन विभाग के अंतर्गत संचालित स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और स्टेट टेक्निकल सपोर्ट यूनिट के बीच होगा।

जनजातीय क्षेत्रों से हुई शुरुआत, प्रशिक्षण पर रहेगा विशेष फोकस

इस साझेदारी के तहत एम्स भोपाल के विशेषज्ञ चिकित्सक और तकनीकी टीम आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सुपरवाइजर्स तथा परियोजना अधिकारियों को विशेष तकनीकी और चिकित्सकीय प्रशिक्षण देंगे। मंत्री निर्मला भूरिया ने बताया कि राज्य के जनजातीय बहुल जिलों झाबुआ और धार में इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत पहले ही की जा चुकी है और आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने की उम्मीद है।

कुपोषण पर शोध और व्यवहार परिवर्तन पर भी होगा कार्य

एम्स भोपाल के विशेषज्ञ चिकित्सक वर्तमान में गंभीर रूप से कुपोषित (एसएएम) बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष अध्ययन कर रहे हैं। इसके साथ ही आईसीएमआर और एनसीओई नई दिल्ली के सहयोग से बेहतर अनुपूरक आहार (टीएचआर) तथा परिवारों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यवहार परिवर्तन संचार पर भी शोध किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सटीक आंकड़ों के आधार पर गंभीर रूप से बीमार और कुपोषित बच्चों की समय पर पहचान कर उन्हें उचित उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है। यह साझेदारी भविष्य में मध्य प्रदेश में विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं के एकीकरण को भी मजबूती देगी।

समीक्षा बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की आयुक्त श्रीमती निधि निवेदिता, एम्स भोपाल के सीएफएम विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण एम. कोकने, नोडल अधिकारी डॉ. अभिजीत पाखरे, राज्य समन्वयक दीपक पाण्डेय सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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