नई दिल्ली, 10 जुलाई।
भारतीय रेलवे ने रायपुर में 250 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के लिए अतिरिक्त होमिंग सुविधाएं विकसित करने की 175 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी है। रेल मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि यह परियोजना लोकोमोटिव रखरखाव अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मंत्रालय के अनुसार, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर स्थित हाई हॉर्स पावर (एचएचपी) डीजल शेड में 250 थ्री-फेज इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के लिए अतिरिक्त होमिंग सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यह परियोजना भारतीय रेलवे के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बेड़े और माल एवं यात्री परिवहन की बढ़ती आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्वीकृत की गई है।
रेलवे के अनुसार, होमिंग का अर्थ किसी लोकोमोटिव को एक निर्धारित लोको शेड से जोड़ना होता है, जहां उसकी नियमित मरम्मत, सुरक्षा निरीक्षण, रखरखाव और समग्र देखभाल की जाती है। इसका उद्देश्य इंजनों का सुरक्षित और कुशल संचालन सुनिश्चित करना है।
इन अतिरिक्त होमिंग सुविधाओं से रायपुर डिपो के मौजूदा बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग हो सकेगा। साथ ही भविष्य में तकनीकी विस्तार और बढ़ती परिचालन आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त क्षमता भी उपलब्ध होगी।
रेल मंत्रालय ने यह भी उल्लेख किया कि इसी महीने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि बुलेट ट्रेन परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। अगले वर्ष सूरत से बिलिमोरा के बीच पहला सेक्शन शुरू होगा। इसके बाद वापी-सूरत, फिर वापी-अहमदाबाद, अहमदाबाद-ठाणे और अंत में अहमदाबाद-मुंबई सेक्शन पर कार्य पूरा किया जाएगा। उन्होंने बताया था कि परियोजना को वर्ष 2029 तक चरणबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य है और गुजरात क्षेत्र में लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
रेल मंत्री के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में बुलेट ट्रेन परियोजना का निर्माण तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है। कई स्थानों पर मौजूदा रेलवे ट्रैक और फ्लाईओवर को पार करते हुए निर्माण कार्य किया जा रहा है, जबकि कुछ जगहों पर डबल क्रॉसिंग जैसी जटिल इंजीनियरिंग संरचनाओं की भी आवश्यकता है।












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