लखनऊ, 11 जुलाई।
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने शनिवार को विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि बसपा के बढ़ते प्रभाव से विरोधी दलों में बेचैनी बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी वजह से विभिन्न राजनीतिक दल साम, दाम, दंड और भेद जैसी रणनीतियों के जरिए दलित और बहुजन समाज के अलग-अलग वर्गों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं।
सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने बयान में मायावती ने कहा कि बसपा अन्य दलों की तरह राजनीतिक और चुनावी स्वार्थ के लिए धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम, तोड़फोड़, अव्यावहारिक वादों या झूठे प्रचार के माध्यम से जनता को गुमराह करने में विश्वास नहीं रखती। उन्होंने कहा कि बसपा स्वयं को देश की एकमात्र अम्बेडकरवादी पार्टी मानती है, जो ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर चलते हुए गरीबों, मजदूरों, शोषितों, पीड़ितों और उपेक्षित वर्गों के हितों के लिए समर्पित है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में बसपा की चार सरकारों के दौरान जनकल्याण, विकास, अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था के क्षेत्र में बेहतर काम हुआ।
बसपा प्रमुख ने किसी राजनीतिक दल का नाम लिए बिना कहा कि चुनाव नजदीक आते ही विरोधी दल अपने राजनीतिक हित साधने के लिए विभिन्न हथकंडे अपना रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दल दलित संगठनों और गुलाम मानसिकता वाले लोगों का सहारा लेकर अपना राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ाना चाहते हैं। मायावती ने कहा कि ऐसे प्रयासों से सर्वसमाज, विशेषकर दलित और बहुजन समाज के लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि बसपा की प्राथमिक चिंता यह है कि गरीब, मजदूर, बेरोजगार युवा, शोषित, पीड़ित और उपेक्षित वर्ग अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरने के दौरान किसी प्रकार के सरकारी उत्पीड़न या द्वेष का शिकार न हों। उनका कहना था कि यदि युवा सरकारी कार्रवाई के चलते मुकदमों या जेल जैसी परिस्थितियों में फंसते हैं तो इससे उनके भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और बसपा ऐसा नहीं चाहती।
मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी चुनावी लाभ के लिए कुछ राजनीतिक दलों और उनके समर्थन वाले दलित संगठनों की तरह छल या दिखावे की राजनीति नहीं करती। उन्होंने कहा कि बसपा संकीर्ण स्वार्थ के लिए अपना रुख बदलने में विश्वास नहीं रखती, बल्कि दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, मुस्लिम समुदाय, अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों और आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण समाज के हितों के लिए अपने महापुरुषों के बताए मार्ग पर चलती है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य के साथ बसपा सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करना चाहती है, ताकि शोषित और पीड़ित वर्गों की आवाज बन सके।











