भोपाल, 11 जुलाई।
राजधानी भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में शनिवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अतुल लोंढे पाटिल ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग की।
पत्रकार वार्ता में प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री मुकेश नायक, पूर्व प्रदेश प्रवक्ता स्वदेश शर्मा, कुंदन पंजाबी, अभिनव बरोलिया और आनंद जाट भी मौजूद रहे। मुकेश नायक ने आरोप लगाया कि भाजपा ने वर्षों से धर्म और आस्था का राजनीतिक उपयोग किया है, जिससे सामाजिक विभाजन की स्थिति बनी है।
राष्ट्रीय प्रवक्ता अतुल लोंढे पाटिल ने दावा किया कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन और दान में प्राप्त सामग्री के रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2020 में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म और भारतीय स्टेट बैंक ने ट्रस्ट की वित्तीय प्रक्रियाओं और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के पालन पर आपत्तियां दर्ज की थीं, लेकिन उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने आरोप लगाया कि दान में प्राप्त चांदी की ईंटों और नकद राशि के प्रबंधन में पारदर्शिता नहीं बरती गई। साथ ही कहा कि प्रारंभिक और अंतिम जांच रिपोर्ट में अंतर होने से जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता ने मंदिर प्रबंधन और जांच से जुड़े कुछ अधिकारियों की नियुक्तियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पूरे मामले में जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष स्पष्ट करने की भी मांग की।
पत्रकार वार्ता के दौरान कांग्रेस ने पांच प्रमुख मांगें भी रखीं। इनमें राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग कर नया ट्रस्ट गठित करने, नए ट्रस्ट में शंकराचार्यों, धर्माचार्यों और संत समाज के प्रतिनिधियों को शामिल करने, पूरे मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में कराने, आरोपित व्यक्तियों के विरुद्ध निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई करने तथा प्रधानमंत्री से इस विषय पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने की मांग शामिल है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस विषय में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है तथा यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।











