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11 Jul, 2026

बीयू के 116 बीएड कॉलेजों की संबद्धता की होगी न्यायिक जांच

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय ने निरीक्षण में सामने आई अनियमितताओं के बाद 116 निजी बीएड कॉलेजों की संबद्धता प्रक्रिया की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने का निर्णय लिया है।

भोपाल, 11 जुलाई।

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) से संबद्ध निजी बीएड कॉलेजों की संबद्धता प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठने के बाद विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद (ईसी) ने 116 निजी कॉलेजों की संबद्धता प्रक्रिया की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने का निर्णय लिया है। निरीक्षण के दौरान कई संस्थानों में अनियमितताएं सामने आईं, जबकि दो कॉलेजों का मौके पर कोई अस्तित्व नहीं मिला।

सबसे बड़ा खुलासा विदिशा रोड स्थित ग्राम मुगलिया कोट में संचालित बताए गए श्रीराम कॉलेज ऑफ एजुकेशन को लेकर हुआ। विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में यह कॉलेज करीब दस वर्षों से संबद्ध दर्ज है, लेकिन औचक निरीक्षण के दौरान मौके पर इसका कोई अस्तित्व नहीं मिला। सूत्रों के अनुसार एक अन्य कॉलेज भी केवल कागजों में संचालित होने की आशंका जताई गई है।

इस घटनाक्रम के बाद विश्वविद्यालय की संबद्धता प्रक्रिया, निरीक्षण व्यवस्था और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की मान्यता प्रणाली पर भी सवाल खड़े हुए हैं।

नए शैक्षणिक सत्र के लिए 127 निजी बीएड कॉलेजों ने संबद्धता और निरंतरता के लिए आवेदन किया था। निरीक्षण के दौरान पांच कॉलेजों में गंभीर अनियमितताएं मिलीं, दो कॉलेज पूरी तरह गायब पाए गए और तीन कॉलेज निर्धारित स्थान के बजाय दूसरे स्थान पर संचालित मिले। इसके बावजूद 24 जून को कार्यपरिषद ने शपथ-पत्र के आधार पर 125 कॉलेजों को सशर्त संबद्धता और निरंतरता प्रदान कर दी थी।

इसके बाद 9 जुलाई को हुई कार्यपरिषद की बैठक में निर्णय लिया गया कि 116 कॉलेजों की संबद्धता प्रक्रिया की विस्तृत जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराई जाएगी। जांच में उन मामलों को भी शामिल किया जाएगा, जिनमें निरीक्षण के बिना राहत दी गई या कार्यपरिषद की अंतिम मंजूरी से पहले ही संबंधित कॉलेजों की प्रोफाइल ई-पोर्टल पर "ओके" कर अपलोड कर दी गई थी।

सामाजिक कार्यकर्ता भगवान सिंह राजपूत ने मार्च में उच्च शिक्षा विभाग, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) को शिकायत भेजकर श्रीराम कॉलेज ऑफ एजुकेशन की वैधता पर सवाल उठाए थे। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कॉलेज केवल कागजों में संचालित हो रहा है, जबकि जिस भूमि पर उसका संचालन दर्शाया गया है, वहां वर्षों से खेती की जा रही है।

शिकायत में पिछले दस वर्षों के निरीक्षण प्रतिवेदन, संबद्धता आदेश, एनसीटीई की मान्यता और प्रवेश अभिलेखों की फोरेंसिक जांच कराने के साथ दोषी अधिकारियों एवं संस्था संचालकों के खिलाफ भ्रष्टाचार, जालसाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग भी की गई है।

निरीक्षण के दौरान एचएल अग्रवाल बीएड कॉलेज और एचएल अग्रवाल कॉलेज ऑफ एजुकेशन, इटारसी एक ही पते पर संचालित दर्शाए गए, जबकि निरीक्षण दल को वहां निर्धारित भवन नहीं मिला। इसके अलावा दीक्षा महाविद्यालय, एडीएस महाविद्यालय, बोनीफाई कॉलेज, भोपाल डिग्री कॉलेज, डॉ. शंकर दयाल शर्मा स्मृति महाविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू कॉलेज, मिलेनियम कॉलेज ऑफ एजुकेशन, श्री द्वारिका प्रसाद यादव महाविद्यालय और तक्षशिला महाविद्यालय सहित कई संस्थानों में गंभीर कमियां सामने आई हैं।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव समर बहादुर सिंह ने बताया कि संबद्धता एवं निरंतरता के लिए 127 कॉलेजों के आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें 125 कॉलेजों को सशर्त संबद्धता दी गई थी। अब कार्यपरिषद ने 116 कॉलेजों की संबद्धता प्रक्रिया की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने की अनुशंसा की है।

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