सरकार व नीतियाँ
11 Jul, 2026

राष्ट्रीय शिक्षा नीति से छोटे शहरों के युवाओं को मिली नई प्रतिस्पर्धी ताकत: डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने छोटे शहरों के युवाओं को समान अवसर देकर उन्हें नवाचार, स्टार्टअप और प्रतिस्पर्धा के लिए अधिक सक्षम बनाया है।

नई दिल्ली, 11 जुलाई।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने शिक्षा में समान अवसर उपलब्ध कराए हैं, जिससे डोडा जैसे छोटे शहरों और कस्बों के युवा अब महानगरों के विद्यार्थियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हुए हैं।

शनिवार को उन्होंने गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज डोडा की ओर से आयोजित दो दिवसीय हाइब्रिड सम्मेलन को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। सम्मेलन का विषय था— “जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का कार्यान्वयन: समावेशन, समानता और पहुंच की चुनौतियां।”

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए हैं। अब विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप विषय चुनने की स्वतंत्रता मिली है। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि कौशल, नवाचार और उद्यमिता को भी बढ़ावा देना है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज रोजगार केवल सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं है। वर्तमान दौर कौशल, रचनात्मकता, स्टार्टअप और नए विचारों का है। उनके अनुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने युवाओं को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के अनुरूप तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज डोडा को इस विषय पर सम्मेलन आयोजित करने के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह संस्थान क्षेत्र की समृद्ध शैक्षणिक परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पहले दूरदराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, लेकिन अब शिक्षा के क्षेत्र में सुविधाओं का तेजी से विस्तार हुआ है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने शिक्षा को अधिक लचीला और बहुविषयक बनाया है। अब छात्र अपनी रुचि के अनुसार विभिन्न विषयों का अध्ययन कर सकते हैं, जिससे सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और रचनात्मक बनी है।

भारत के बढ़ते स्टार्टअप क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में देश में लगभग 350 स्टार्टअप थे, जबकि आज इनकी संख्या 2.3 लाख से अधिक हो चुकी है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 शहरों से सामने आ रहे हैं, जो नवाचार के बढ़ते दायरे को दर्शाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीएसआईआर अरोमा मिशन के तहत लैवेंडर क्रांति का उदाहरण देते हुए कहा कि भदेरवाह और डोडा ने विज्ञान आधारित उद्यमिता की नई मिसाल पेश की है। उन्होंने कहा कि लैवेंडर की खेती से स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर मिले हैं तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।

उन्होंने कहा कि डोडा हिमालयी उत्पादों, सुगंध आधारित उद्योगों और नवाचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। उन्होंने गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज डोडा को आयुष मंत्रालय, जम्मू-कश्मीर सरकार और सीएसआईआर के सहयोग से स्थानीय उत्पादों और उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य करने का सुझाव दिया।

उन्होंने शिक्षण संस्थानों से प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और पीएम विश्वकर्मा योजना जैसी सरकारी पहलों की जानकारी विद्यार्थियों तक पहुंचाने की अपील की, ताकि युवा अपने ज्ञान और कौशल को रोजगार तथा उद्यमिता से जोड़ सकें।

डिजिटल तकनीक की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इंटरनेट और डिजिटल सुविधाओं ने दूरदराज के क्षेत्रों के युवाओं के लिए नए अवसर खोले हैं। अब छोटे शहरों के विद्यार्थी भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और बेहतर करियर के अवसर प्राप्त कर रहे हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2047 में भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने पर वर्तमान युवा पीढ़ी ही देश का नेतृत्व करेगी। उन्होंने शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों से युवाओं को नवाचार, उद्यमिता और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

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