ग्वालियर, 11 जुलाई।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में शासकीय कार्यों में लापरवाही, बिना अनुमति लंबे समय तक अनुपस्थित रहने और विभागीय लक्ष्यों की पूर्ति नहीं करने पर चार सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्राधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, शासन हित से जुड़े एक न्यायालयीन प्रकरण में कथित लापरवाही बरतने पर एक पटवारी के खिलाफ भी निलंबन और विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए हैं।
कलेक्टर रुचिका चौहान द्वारा जारी आदेश के अनुसार निलंबित सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्राधिकारियों में पारसेन पशु चिकित्सालय के अनिल वित्तल, कृत्रिम गर्भाधान उपकेंद्र भगेह के विवेक कोटिया, कामधेनु नगर मेला ग्राउंड पशु चिकित्सालय के राजपाल धाकड़ तथा भितरवार पशु चिकित्सालय की अंतिमा यादव शामिल हैं।
उपस्थिति पंजी और ई-अटेंडेंस की समीक्षा में पाया गया कि संबंधित अधिकारी बिना सक्षम अनुमति के लंबे समय से अपने मुख्यालय से अनुपस्थित थे। उनकी अनुपस्थिति के कारण शासन द्वारा निर्धारित कृत्रिम गर्भाधान और टीकाकरण के लक्ष्य पूरे नहीं हो सके तथा उनकी उपलब्धि शून्य रही।
पशुपालन एवं डेयरी विभाग की रिपोर्ट और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की अनुशंसा के आधार पर कलेक्टर ने प्रथम दृष्टया इसे शासकीय कार्यों के प्रति गंभीर लापरवाही, कर्तव्य के प्रति उदासीनता तथा मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियमों का उल्लंघन माना। इसके बाद मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों के तहत चारों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश दिए गए। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय उपसंचालक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, ग्वालियर निर्धारित किया गया है तथा उन्हें नियमानुसार जीवन-निर्वाह भत्ता मिलेगा।
इसी क्रम में ग्वालियर ग्रामीण तहसील के पटवारी कुलदीप चाहर को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। आरोप है कि उन्होंने व्यवहार न्यायालय में विचाराधीन एक दीवानी प्रकरण में शासन की ओर से साक्षी के रूप में उपस्थित रहते हुए मूल राजस्व अभिलेखों का मिलान किए बिना वादी पक्ष के दस्तावेज स्वीकार किए और उपलब्ध अभिलेखों का समुचित प्रस्तुतिकरण नहीं किया, जिससे शासन के हित प्रभावित होने की संभावना उत्पन्न हुई।
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ग्वालियर सिटी की रिपोर्ट के आधार पर पटवारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। जवाब असंतोषजनक पाए जाने के बाद कलेक्टर ने उन्हें मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 तथा मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए।
निलंबन अवधि में पटवारी कुलदीप चाहर का मुख्यालय तहसीलदार कार्यालय, डबरा निर्धारित किया गया है। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को सात दिन के भीतर आरोप-पत्र और आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि विभागीय जांच नियमानुसार शुरू की जा सके।











