इंदौर, 11 जुलाई।
मध्य प्रदेश शासन द्वारा इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 'माय यूथ माय प्राइड कॉन्क्लेव 2026' के अंतर्गत शनिवार को 'शिक्षा एवं कौशल विकास' विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, कौशल विकास और युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त प्रबल सिपाहा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर कौशल और सर्वांगीण विकास से जोड़ा है। इससे युवा आत्मनिर्भर बनने के साथ रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि 'पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस' के माध्यम से विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि कार्यशाला में युवाओं के सुझावों को "युवा संकल्प" में शामिल किया जाएगा।
कौशल विकास संचालनालय के संचालक बसंत कुर्रे ने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव है। उन्होंने युवाओं से केवल रोजगार तलाशने के बजाय रोजगार सृजित करने की क्षमता विकसित करने का आह्वान किया।
होलकर विज्ञान महाविद्यालय से संबद्ध एवं उच्च शिक्षा विभाग की एसएसी सेल की सदस्य डॉ. स्वागता गुप्ता ने 'उच्च शिक्षा की प्रणाली और उन्नत भारत' विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक और प्रभावी परिवर्तन लाना भी होना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को इसी सोच पर आधारित बताया और उच्च शिक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यशाला में युवाओं ने शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार से जुड़े विभिन्न सुझाव भी दिए, जिन पर विशेषज्ञों ने संवाद किया और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
इस अवसर पर कौशल विकास संचालनालय के अधिकारियों, शिक्षाविदों और विभिन्न महाविद्यालयों के बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया।











