राजगढ़, 11 जुलाई।
राजगढ़ जिले के ब्यावरा स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने करीब छह वर्ष पुराने गौवंश अवैध परिवहन और पशु क्रूरता से जुड़े मामले में चार आरोपितों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को एक-एक वर्ष के सश्रम कारावास और 10,100 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सहायक निदेशक अभियोजन आलोक श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में शासन की ओर से पैरवी कर रहे एडीपीओ राजेंद्र सोनी ने बताया कि 30 सितंबर 2020 को देहात ब्यावरा थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि गुना की ओर से आ रहे एक कंटेनर में बड़ी संख्या में गौवंश को भरकर ले जाया जा रहा है। सूचना मिलने पर पुलिस ने रिलायंस पेट्रोल पंप के पास वाहन को रोकने का प्रयास किया। इस दौरान चालक और क्लीनर भागने लगे, लेकिन उन्हें पकड़ लिया गया।
पुलिस द्वारा कंटेनर की तलाशी लेने पर उसमें 59 गौवंश ठूंसकर भरे हुए मिले। सभी पशुओं के पैर रस्सियों से बंधे थे और कई गंभीर रूप से घायल पाए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपितों के पास गौवंश के परिवहन से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं था। पुलिस के अनुसार गौवंश को महाराष्ट्र के वरुण गांव वध के उद्देश्य से ले जाया जा रहा था। मामले में अकरम, मोहम्मद इकराम, शरीफ और मोहम्मद इमरान के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम तथा कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था।
विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष महत्वपूर्ण साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने चारों आरोपितों को दोषी मानते हुए प्रत्येक को एक वर्ष के सश्रम कारावास और 10,100 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।











