नई दिल्ली, 15 जुलाई।
उत्तर प्रदेश को फार्मा और मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में एक वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी) और उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल के बीच एक समझौता हुआ है, जिसका मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार और गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।
इस नई साझेदारी के तहत राज्य में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के मानक को और अधिक सख्त बनाया जाएगा। इसके अलावा फार्माकोविजिलेंस और मैटेरियोविजिलेंस के जरिए दवाओं तथा उपकरणों के सुरक्षा मानकों की बारीकी से निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।
साझा प्रशिक्षण कार्यक्रमों और कार्यशालाओं के जरिए इस क्षेत्र से जुड़े हितधारकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे न केवल उद्योग जगत बल्कि शैक्षणिक संस्थानों के बीच भी बेहतर तालमेल बनेगा, जो शोध और नवाचार को बढ़ावा देने में मददगार साबित होगा।
विशेष रूप से लघु और मध्यम उद्यमों पर सरकार का खास ध्यान है। उन्हें प्रतिकूल घटनाओं की त्वरित और डिजिटल रिपोर्टिंग के लिए अत्याधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे बाजार में उपलब्ध उत्पादों की गुणवत्ता की बेहतर निगरानी संभव हो सकेगी।
इस रणनीतिक साझेदारी का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी और मेडिकल डिवाइस का प्रमुख हब विकसित करना है। इससे न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, बल्कि मरीजों को उच्च स्तरीय और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं भी प्राप्त हो सकेंगी।















