काठमांडू, 15 जुलाई।
नेपाल में प्रेस की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति पर मंडराते संकट ने वैश्विक पत्रकारों के संगठन आईयूजे को चिंतित कर दिया है। काठमांडू के प्रमुख मीडिया घरानों के बाहर वाहनों से रास्ता रोकने जैसी घटनाओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जेन-जी आंदोलन के बाद सत्ता में आई सरकार के रुख से मीडिया जगत में गहरा भय और असुरक्षा का माहौल है। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के कार्यकाल में प्रेस की आजादी को बाधित करने वाली घटनाओं में तेजी देखी गई है।
कांतिपुर मीडिया ग्रुप, ऑनलाइनखबर और हिमालय टेलिविजन के दफ्तरों के बाहर किए गए अवरोध की कड़ी निंदा की गई है। इसके साथ ही वरिष्ठ पत्रकार को मिली धमकियां और उन्हें हिरासत में लेने की कोशिशों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
सरकार पर निजी मीडिया को सरकारी विज्ञापनों से दूर रखने की नीति अपनाने के गंभीर आरोप लगे हैं। जानकारों का कहना है कि ऐसी कोशिशें स्वतंत्र पत्रकारिता और मीडिया की विविधता के लिए बड़ा खतरा हैं।
इन हालातों के कारण पत्रकारों में सेल्फ-सेंसरशिप की प्रवृत्ति बढ़ रही है। प्रतिशोध और डराने-धमकाने के माहौल के कारण पत्रकार खुलकर रिपोर्टिंग करने से बच रहे हैं, जो सीधे तौर पर जनता के सूचना पाने के अधिकार पर प्रहार है।















