वाशिंगटन, 15 जुलाई।
अमेरिका ने रूसी ऊर्जा आयात पर लगाए जाने वाले प्रस्तावित टैरिफ को लेकर बड़ा नरम रुख अपनाया है। पहले रूसी तेल और गैस पर 500 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का प्रस्ताव था, जिसे अब घटाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया है। इस बदलाव से भारत और चीन जैसे देशों को बड़ी राहत मिली है।
यह संशोधित विधेयक दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम और रिचर्ड ब्लुमेन्थल द्वारा पेश किया गया था। इस कदम का मुख्य उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है ताकि यूक्रेन में जारी सैन्य संघर्ष को समाप्त किया जा सके। अमेरिकी सांसदों का मानना है कि यह प्रतिबंध मॉस्को की कमर तोड़ने में प्रभावी होंगे।
नए प्रस्ताव में उन देशों को विशेष छूट देने का भी प्रावधान है जो रूस से 15 प्रतिशत से कम प्राकृतिक गैस का आयात करते हैं और इसे कम करने की दिशा में ठोस कदम उठा रहे हैं। इसमें जापान, फ्रांस, हंगरी और बेल्जियम जैसे देश शामिल हो सकते हैं।
विधेयक में रूस के 'शैडो फ्लीट' टैंकरों, वित्तीय संस्थानों और यमल एलएनजी जैसी बड़ी ऊर्जा परियोजनाओं पर भी कड़े प्रतिबंधों की बात कही गई है। साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रीय हित में इन प्रतिबंधों को माफ करने का विशेष अधिकार भी दिया गया है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे लिंडसे ग्राहम को एक सच्ची श्रद्धांजलि बताया है और इस विधेयक के कानून बनने की प्रबल संभावना जताई है। हालांकि, कुछ डेमोक्रेटिक नेताओं ने इसमें अन्य लक्ष्यों को जोड़ने के प्रति सावधानी बरतने की सलाह दी है ताकि प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।















