रायपुर, 15 जुलाई।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की हालिया रिपोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार की वित्तीय स्थिति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश की अर्थव्यवस्था 11 प्रतिशत की दर से जरूर बढ़ी है, लेकिन राजकोषीय प्रबंधन में खामियों के चलते लक्ष्यों को हासिल करने में राज्य पिछड़ गया है।
कैग के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में राज्य का जीएसडीपी बढ़कर 5.67 लाख करोड़ रुपये पर पहुँच गया है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 11 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, राजस्व घाटा 599 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है, जबकि सरकार ने राजस्व आधिक्य का लक्ष्य रखा था।
राज्य पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। लोक ऋण का आंकड़ा 33,463 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है, जिसमें से करीब 47 प्रतिशत राशि केवल पुराने ऋणों को चुकाने में ही खर्च हो गई। कुल राजस्व प्राप्तियों का एक बड़ा हिस्सा, यानी 7.44 प्रतिशत, केवल ब्याज भुगतान में चला जा रहा है।
रिपोर्ट में इस बात पर भी चिंता जताई गई है कि बजट में 15,636 करोड़ रुपये का प्रावधान होने के बावजूद खर्च नहीं किया जा सका। वहीं, 25 नई योजनाओं के लिए आवंटित 261.41 करोड़ रुपये पूरी तरह अप्रयुक्त रहे। इसके अलावा छह विनियोगों में निर्धारित बजट से 1,538.65 करोड़ रुपये अधिक खर्च हुए हैं, जिन्हें नियमित करना आवश्यक है।
कैग ने स्पष्ट किया है कि भले ही राज्य की वित्तीय स्थिति अभी संतोषजनक है, लेकिन कर्ज और ब्याज का बढ़ता दबाव भविष्य में बड़ी चुनौती बन सकता है। रिपोर्ट में बजट प्रबंधन में पारदर्शिता लाने और पूंजीगत व्यय बढ़ाने पर जोर देने की सलाह दी गई है।














