नागपुर, 15 जुलाई।
कभी नक्सली हिंसा और गोलियों की गूँज के बीच पलने वाले गड़चिरौली और चंद्रपुर के आदिवासी छात्र अब नई उम्मीदों की उड़ान भर रहे हैं। नक्सलवाद से प्रभावित इन अंचलों के 18 विद्यार्थियों ने हाल ही में आईआईएम नागपुर का दौरा किया। विश्वस्तरीय शैक्षणिक सुविधाओं को देखकर इन युवाओं की आँखों में बेहतर भविष्य के सपने साकार होते नजर आए।
यह शैक्षणिक यात्रा चंद्रपुर की 'जागृत' नामक सामाजिक संस्था द्वारा आयोजित की गई थी। छात्रों ने आईआईएम के विशाल पुस्तकालय, आधुनिक भवन और अत्याधुनिक तकनीक को करीब से देखा। उनके लिए यह दौरा केवल एक भ्रमण नहीं, बल्कि अपने जीवन को नई दिशा देने वाला एक प्रेरणादायी अनुभव साबित हुआ।
आईआईएम नागपुर के निदेशक डॉ. भीमराया मैत्री ने छात्रों से अपने परिवार के मुखिया की तरह संवाद किया। उन्होंने अपने संघर्षों को साझा करते हुए बताया कि वे सतारा जिले के एक बहुत ही पिछड़े गाँव से आते हैं, जहाँ बुनियादी सुविधाएँ भी नहीं थीं। उन्होंने कहा कि कठिन मेहनत से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।
डॉ. मैत्री ने छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि माता-पिता की अशिक्षा सफलता में कभी बाधा नहीं बन सकती। जब एक विद्यार्थी ने उनसे स्मार्ट वर्क और हार्ड वर्क के बारे में पूछा, तो उन्होंने साफ कहा कि कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता, जो समय के साथ स्वयं ही स्मार्ट वर्क में बदल जाता है।
संस्थान के प्रो. शैलेंद्र निगम ने भी छात्रों को उच्च शिक्षा के अवसरों, मेरिट आधारित छात्रवृत्ति और सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने छात्रों से स्पष्ट कहा कि वे आर्थिक तंगी की चिंता छोड़ केवल अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें। यह अनुभव इन बच्चों के लिए जीवन बदलने वाला रहा, जो अब बड़े सपनों को पूरा करने का संकल्प लेकर अपने गाँवों की ओर लौटे हैं।















