रायपुर, 15 जुलाई।
छत्तीसगढ़ में मानसून की सुस्त चाल के कारण आम जनजीवन और कृषि पर इसका असर दिखाई देने लगा है। प्रदेश में अब तक औसत से करीब 29 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बन रहे नए सिस्टम से मानसून फिर से सक्रिय होने की उम्मीद है। 1 जून से 15 जुलाई तक सामान्यतः 320 से 350 मिलीमीटर तक वर्षा होती है, लेकिन इस बार आंकड़ा काफी पीछे चल रहा है।
राज्य के 16 जिले अभी भी पानी की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं। हालांकि, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और सक्ती जिले में मानसून काफी मेहरबान रहा है, जहाँ सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है।
आने वाले 24 से 48 घंटों में मानसूनी गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। विभाग ने कई जिलों में गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। खास तौर पर उत्तर छत्तीसगढ़ में बारिश का क्षेत्र अधिक रहने के आसार हैं।
राजधानी रायपुर में भी सुबह से ही बादलों का डेरा जमा हुआ है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक तापमान में गिरावट और मौसम के सुहावने बने रहने की बात कही है। द्रोणिका और चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।














