भोपाल, 23 जुलाई।
इस बार मानसून ने समय से पहले दस्तक तो दी, लेकिन उसके बाद जैसे रूठ ही गया। बरसात के अभाव और बार-बार बदलते मौसम के कारण बीमारियों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। शहर के सरकारी और निजी अस्पतालों में पिछले पंद्रह दिनों से सर्दी, खांसी और बुखार के मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। डॉक्टरों का कहना है कि मौसम में अचानक होने वाले बदलाव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर सीधा असर डाल रहे हैं, जिससे लोग तेजी से वायरल संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं।
पिछले वर्ष इसी समय तक अच्छी बारिश हो चुकी थी, जिससे तापमान सामान्य बना हुआ था और वातावरण में नमी का स्तर भी संतुलित था। इस बार बारिश नहीं होने से दिन में तेज धूप और रात में ठंडक का माहौल बन रहा है। सुबह और शाम मौसम अपेक्षाकृत ठंडा रहता है, जबकि दोपहर में उमस और गर्मी बढ़ जाती है। इसी उतार-चढ़ाव ने वायरल संक्रमण को बढ़ावा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब एक ही दिन में तापमान में आठ से दस डिग्री तक का अंतर आता है, तो शरीर को उसके अनुरूप ढलने में समय लगता है। इसी दौरान वायरस आसानी से हमला कर देते हैं और सर्दी, खांसी, गले में खराश तथा हल्के बुखार जैसी समस्याएं सामने आने लगती हैं।
अस्पतालों की ओपीडी में बढ़ती भीड़ इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। सरकारी अस्पताल के मेडिसिन विभाग में प्रतिदिन तीन सौ से अधिक मरीज सर्दी, खांसी और बुखार की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चों और बुजुर्गों की संख्या सबसे अधिक है। बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल खुलने के बाद बच्चों का आपसी संपर्क बढ़ा है और बदलते मौसम में वायरल संक्रमण तेजी से फैल रहा है। कई बच्चों को लगातार पांच से छह दिन तक बुखार बना हुआ है। इसके साथ ही उल्टी और दस्त की शिकायत भी सामने आ रही है। बुजुर्गों की स्थिति अधिक गंभीर है, क्योंकि उनमें पहले से ही सांस, मधुमेह और अन्य पुरानी बीमारियां होती हैं, जिन पर मौसम का बदलाव अतिरिक्त असर डालता है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बरसात नहीं होने से हवा में धूल और प्रदूषण के कणों की मात्रा बढ़ गई है। नमी की कमी के कारण ये कण लंबे समय तक हवा में बने रहते हैं और सांस के जरिए सीधे फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। इससे एलर्जी, अस्थमा और साइनस के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। रात की ओस और सुबह की ठंडी हवा गले तथा नाक को प्रभावित कर रही है। डॉक्टर सलाह दे रहे हैं कि सुबह और शाम घर से निकलते समय हल्के गर्म कपड़े पहनें तथा ठंडा पानी पीने से बचें, क्योंकि शरीर के तापमान में अचानक बदलाव से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
फार्मेसी और मेडिकल स्टोरों पर भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। बुखार, सर्दी और खांसी की दवाओं की मांग में 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। पैरासिटामोल, सिट्रिजिन और खांसी की सिरप की बिक्री सबसे अधिक हो रही है। कुछ स्थानों पर दवाओं का स्टॉक कम होने की शिकायत भी मिली है। केमिस्टों का कहना है कि अनेक लोग बिना डॉक्टर की सलाह के स्वयं दवा खरीदकर खा रहे हैं, जो खतरनाक हो सकता है। वायरल बुखार, डेंगू और मलेरिया के शुरुआती लक्षण कई बार एक जैसे होते हैं, इसलिए बिना जांच के दवा लेना जोखिम बढ़ा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने भी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट पर रखा है। डॉक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि बुखार के प्रत्येक मरीज की सावधानीपूर्वक जांच की जाए तथा आवश्यकता अनुसार मलेरिया और अन्य जरूरी जांच कराई जाए। अस्पतालों में बुखार वार्ड और आइसोलेशन बेड की संख्या भी बढ़ाई गई है। स्कूलों को सलाह दी गई है कि जिन बच्चों में सर्दी, खांसी या बुखार के लक्षण हों, उन्हें घर भेजा जाए और विद्यालयों में स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाए।
घरेलू स्तर पर भी सावधानी बेहद जरूरी है। डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। हल्का गर्म पानी और काढ़ा लाभदायक हो सकता है। धूप से आने के तुरंत बाद पंखे या कूलर के सामने बैठने से बचें और भीगे कपड़े तुरंत बदल लें। फल और हरी सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही खाएं, क्योंकि बारिश न होने से उन पर धूल अधिक जम रही है। हाथ धोने की आदत को भी नियमित बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि अधिकांश वायरल संक्रमण हाथों के माध्यम से ही फैलते हैं।
पूरे परिदृश्य के पीछे जलवायु परिवर्तन और अनियमित मानसून बड़ी वजह बनकर उभरे हैं। पिछले कुछ वर्षों से मौसम का चक्र लगातार बदल रहा है। कभी समय से पहले बारिश, कभी देर से और कभी सामान्य से बहुत कम वर्षा होने का सीधा असर जनस्वास्थ्य पर पड़ रहा है। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं होती, तो वायरल संक्रमण का यह दौर और लंबा खिंच सकता है। मौसम हमारे नियंत्रण में नहीं है, लेकिन सावधानी, संतुलित खानपान और समय पर उपचार अपनाकर इस संक्रमण से काफी हद तक बचा जा सकता है।










