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सरकार व नीतियाँ
27 Jul, 2026

चार श्रम संहिताओं पर बीएमएस का मंथन, दो के समर्थन और दो में संशोधन की मांग

बीएमएस ने चार श्रम संहिताओं की समीक्षा करते हुए वेतन और सामाजिक सुरक्षा संहिता का समर्थन किया, जबकि औद्योगिक संबंध और व्यावसायिक सुरक्षा संहिता में संशोधन की मांग उठाई।

रांची, 28 जुलाई।

भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यसमिति की बैठक के दूसरे दिन सोमवार को सरला बिरला विश्वविद्यालय, नामकुम में श्रम कानूनों और श्रमिक हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत मंथन हुआ। बैठक में केंद्र सरकार की चार श्रम संहिताओं की समीक्षा करते हुए बीएमएस ने वेतन संहिता-2019 और सामाजिक सुरक्षा संहिता-2020 का समर्थन किया, जबकि औद्योगिक संबंध संहिता-2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता-2020 में संशोधन की आवश्यकता बताई।

बैठक में संगठन ने कहा कि चारों श्रम संहिताएं 21 नवंबर 2025 से लागू हैं, लेकिन श्रमिकों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधानों में सुधार की जरूरत बनी हुई है। बीएमएस का कहना है कि उसका उद्देश्य श्रम कानूनों का विरोध करना नहीं, बल्कि उनमें ऐसे बदलाव कराना है, जिससे श्रमिकों के अधिकार, रोजगार की सुरक्षा और कार्यस्थल पर सम्मान सुनिश्चित हो सके। संगठन का मत है कि 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को समेकित कर बनाई गई इन संहिताओं को और अधिक श्रमिक हितैषी बनाया जाना चाहिए।

औद्योगिक संबंध संहिता-2020 पर चर्चा के दौरान बीएमएस ने 13 बिंदुओं पर असहमति जताई। इनमें उद्योग, वेतन और कामगार की परिभाषा, वार्ताकार संघ की मान्यता, वार्षिक विवरणी तथा ट्रेड यूनियनों के अधिकारों से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। संगठन ने कहा कि इन प्रावधानों में संशोधन कर सामूहिक सौदेबाजी की व्यवस्था और श्रमिक संगठनों की भूमिका को अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए।

इसी तरह व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता-2020 के 15 प्रावधानों पर भी संगठन ने आपत्ति दर्ज कराई। इनमें कारखाने और कार्य गतिविधियों की परिभाषा, वेतन संबंधी प्रावधान तथा कार्यस्थलों पर सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों से जुड़े विषय शामिल हैं। बीएमएस का कहना है कि श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े नियम ऐसे होने चाहिए, जिनसे उनके हितों से कोई समझौता न हो।

संगठन ने दोहराया कि वह पहले भी इन दोनों संहिताओं में व्यापक विचार-विमर्श के बाद संशोधन की मांग करता रहा है। वहीं, वेतन संहिता-2019 और सामाजिक सुरक्षा संहिता-2020 को श्रमिकों के हित में महत्वपूर्ण बताते हुए उनका समर्थन किया। बीएमएस का मानना है कि इन दोनों संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन से श्रमिकों को बेहतर वेतन संरचना और सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा।

बैठक में यह मांग भी उठाई गई कि श्रम कानूनों का प्रभावी और समान रूप से सभी श्रमिकों पर अनुपालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों को समान अधिकार और सुरक्षा मिल सके।

कार्यसमिति की बैठक की अध्यक्षता बीएमएस के अखिल भारतीय अध्यक्ष एस. मल्लेशम ने की, जबकि संचालन अखिल भारतीय महामंत्री सुरेंद्र कुमार पांडेय ने किया। दोनों पदाधिकारी वर्ष 2026-29 के लिए संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व में निर्वाचित हुए हैं।

तीन दिवसीय यह बैठक 28 जुलाई तक चलेगी। इसमें देशभर से आए प्रतिनिधि श्रमिकों की समस्याओं, श्रम कानूनों, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और अन्य समसामयिक श्रमिक मुद्दों पर चर्चा कर आगे की रणनीति तय करेंगे।

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