नई दिल्ली, 27 जुलाई।
प्रधानमंत्री-विद्यालक्ष्मी (पीएम-विद्यालक्ष्मी) योजना के तहत नवंबर 2024 में शुरुआत के बाद से 21 जुलाई 2026 तक 1,12,817 छात्रों को बिना गारंटी और बिना संपार्श्विक (कोलेटरल) के शिक्षा ऋण स्वीकृत किए गए हैं। इन ऋणों की कुल स्वीकृत राशि 15,634.78 करोड़ रुपये रही है।
शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने सोमवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि योजना का उद्देश्य आर्थिक तंगी के कारण किसी भी मेधावी छात्र की उच्च शिक्षा बाधित न होने देना है। इसके तहत देश के शीर्ष गुणवत्ता वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में मेरिट के आधार पर प्रवेश लेने वाले छात्रों को बिना गारंटी और बिना संपार्श्विक के शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
उन्होंने बताया कि जिन छात्रों के परिवार की वार्षिक आय आठ लाख रुपये तक है, उन्हें 10 लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण पर तीन प्रतिशत ब्याज अनुदान भी दिया जाता है। इस सुविधा का लाभ प्रतिवर्ष एक लाख नए पात्र छात्रों को दिया जाता है, बशर्ते वे किसी अन्य छात्रवृत्ति या ब्याज अनुदान योजना का लाभ नहीं ले रहे हों। सरकार ने वर्ष 2024-25 से 2030-31 तक की अवधि के लिए 3,600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिससे करीब सात लाख नए छात्रों को लाभ मिलने का लक्ष्य है।
राज्यमंत्री ने बताया कि 25 फरवरी 2025 से संचालित समर्पित पीएम-विद्यालक्ष्मी पोर्टल के माध्यम से छात्र सभी बैंकों के लिए एकीकृत और सरल प्रक्रिया के जरिए शिक्षा ऋण तथा ब्याज अनुदान के लिए आवेदन कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि पीएम उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन क्रेडिट गारंटी फंड योजना (पीएम-यूएसपी सीजीएफएसईएल) के तहत भी छात्रों को बिना संपार्श्विक और तीसरे पक्ष की गारंटी के 7.5 लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण पर केंद्र सरकार 75 प्रतिशत तक की क्रेडिट गारंटी प्रदान करती है। वर्ष 2015 से 21 जुलाई 2026 तक इस योजना के अंतर्गत 14,65,880 क्रेडिट गारंटी जारी की गई हैं, जिनकी कुल राशि 59,843.74 करोड़ रुपये है।
उन्होंने बताया कि ब्याज अनुदान का लाभ केवल पात्र छात्रों तक पहुंचाने के लिए आधार आधारित सत्यापन किया जाता है। पात्रता की पुष्टि होने के बाद ब्याज अनुदान की राशि छात्रों के डिजिटल वॉलेट में भेजी जाती है, जिसे छात्र की सहमति पर प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से शिक्षा ऋण खाते में जमा किया जाता है। दूसरे वर्ष से ब्याज अनुदान जारी रखने के लिए छात्र का शैक्षणिक प्रदर्शन संतोषजनक होना भी आवश्यक है।
डॉ. मजूमदार ने बताया कि योजना में सभी अनुसूचित बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंक शामिल हैं। वर्तमान में पोर्टल पर 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, 20 निजी बैंक, 25 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और सात सहकारी बैंक जुड़े हुए हैं, जिससे ग्रामीण, जनजातीय और वंचित वर्गों के छात्रों को भी शिक्षा ऋण प्राप्त करने में सुविधा मिल रही है।
उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति और शिक्षा ऋण योजनाओं के कारण उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़ा है। देश में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात वर्ष 2013-14 के 23.0 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2023-24 में 30.0 प्रतिशत हो गया है।
















