भोपाल, 29 जुलाई।
मध्यप्रदेश में शासकीय भर्ती परीक्षाओं के पैटर्न में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब राज्य की सभी भर्ती परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को हर प्रश्न का उत्तर ऑनलाइन दर्ज कराने का अवसर मिलेगा और परीक्षा से पहले पांच माह का समय तैयारी के लिए दिया जाएगा। यह निर्णय परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने तथा नकल एवं पेपर लीक जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लिया गया है। राज्य सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से भर्ती प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय और समयबद्ध होगी तथा योग्य अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सकेगा।
नई व्यवस्था के अनुसार परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को मोबाइल ऐप और वेबसाइट के माध्यम से परीक्षा पैटर्न, पाठ्यक्रम तथा अभ्यास प्रश्न उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे घर बैठे ही अपनी तैयारी कर सकें। परीक्षा के दौरान प्रत्येक प्रश्न का उत्तर देने के बाद उसे ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करना होगा, जिससे मूल्यांकन की प्रक्रिया तेज होगी और परिणाम भी शीघ्र घोषित किए जा सकेंगे। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रणाली से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि मानवीय त्रुटियों की संभावना भी कम होगी और अभ्यर्थियों को अपनी मेहनत का सही परिणाम मिलेगा।
राज्य सरकार ने इस बदलाव को लागू करने से पहले सभी जिलों के अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ विस्तृत चर्चा की है। बैठक में तय किया गया है कि नई प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और पहले चरण में पटवारी, शिक्षक, पुलिस तथा अन्य प्रमुख भर्ती परीक्षाओं में इसे अपनाया जाएगा। इसके लिए सभी परीक्षा केंद्रों पर आवश्यक तकनीकी व्यवस्थाएं की जा रही हैं और कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा उत्पन्न न हो। यह कदम मध्यप्रदेश की भर्ती प्रक्रिया को राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के अनुरूप लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पहले की व्यवस्था में पेपर आधारित परीक्षा और मैनुअल मूल्यांकन के कारण परिणाम आने में देरी होती थी और कई बार गड़बड़ियों की शिकायतें भी सामने आती थीं। अब ऑनलाइन उत्तर दर्ज करने और डिजिटल मूल्यांकन से पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो जाएगी। अभ्यर्थी परीक्षा हॉल से बाहर निकलते ही अपने उत्तरों की स्थिति देख सकेंगे, जिससे उनके मन में किसी प्रकार का संदेह नहीं रहेगा।
ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए परीक्षा से पहले पांच माह का समय दिया जाएगा। इस दौरान सरकार की ओर से निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग और मॉक टेस्ट की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र भी प्रतियोगिता में पीछे न रहें। इसके साथ ही सभी जिलों में हेल्प डेस्क बनाए जाएंगे, जहां अभ्यर्थी नई प्रणाली से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और अपनी समस्याओं का समाधान भी पा सकेंगे।
हालांकि, कुछ अभ्यर्थी संगठनों ने नई व्यवस्था को लेकर प्रारंभिक चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि जिन क्षेत्रों में इंटरनेट और बिजली की समस्या है, वहां तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं। सरकार ने आश्वासन दिया है कि परीक्षा केंद्रों पर निर्बाध बिजली और इंटरनेट की व्यवस्था की जाएगी तथा किसी भी तकनीकी खराबी की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था पहले से तैयार रखी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि नई प्रणाली पूरी तरह से परीक्षार्थी हित में है और इसका उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया को अधिक सुगम, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है।
राजनीतिक गलियारों में भी इस फैसले की सराहना हो रही है। माना जा रहा है कि यदि नई प्रणाली ईमानदारी से लागू होती है तो यह युवाओं के लिए बड़ी राहत साबित होगी, क्योंकि पिछले कई वर्षों से भर्ती परीक्षाओं में देरी और अनियमितताओं के कारण हजारों युवा प्रभावित हुए हैं। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी इस व्यवस्था को समयबद्ध तरीके से लागू करने और यह सुनिश्चित करने की है कि प्रत्येक अभ्यर्थी को समान अवसर मिले।
परीक्षा के पैटर्न में किया गया यह बदलाव मध्यप्रदेश के युवाओं के भविष्य के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। ऑनलाइन उत्तर दर्ज कराने की सुविधा से पारदर्शिता बढ़ेगी, पांच माह की तैयारी से अभ्यर्थियों को बेहतर अवसर मिलेगा और तकनीक के उपयोग से पूरी प्रक्रिया अधिक तेज एवं प्रभावी होगी। अब देखना यह है कि सरकार अपनी इस घोषणा को जमीनी स्तर पर कितनी मजबूती से लागू करती है और इसका लाभ प्रदेश के लाखों युवाओं तक कितनी शीघ्रता से पहुंचा पाती है।

















