श्रीनगर, 29 जुलाई।
सेशंस कोर्ट ने आईपीएस अधिकारी जीवी संदीप चक्रवर्ती के खिलाफ चल रही आपराधिक अवमानना की कार्यवाही को निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने न्यायिक मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों के लिए वारंट जारी करने और उनके क्रियान्वयन से संबंधित कई दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।
वर्तमान में श्रीनगर के एसएसपी के पद पर कार्यरत चक्रवर्ती की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए दूसरे अतिरिक्त सेशंस जज नौशाद अहमद खान ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी तरुण महाजन के 6 जुलाई के आदेश को रद्द कर दिया। मजिस्ट्रेट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए आईपीएस अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोप था कि उन्होंने अदालत के कई आदेशों की अनदेखी कर न्यायालय के अधिकार का उल्लंघन किया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि न्यायिक प्रक्रियाओं के समय पर पालन को लेकर न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा व्यक्त की गई चिंता सद्भावना के साथ न्यायिक दायित्वों के निर्वहन के दौरान सामने आई थी। इसका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा और प्रभावी संचालन को बनाए रखना था।
जज नौशाद अहमद खान ने स्पष्ट किया कि इस आदेश का अर्थ पुनरीक्षण याचिकाकर्ता की ईमानदारी, क्षमता या सद्भावना पर किसी प्रकार का प्रश्नचिह्न लगाना नहीं है, क्योंकि वह भी अपने आधिकारिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि विवादित आदेश में जानबूझकर गलत आचरण, न्याय में बाधा पहुंचाने, बार-बार आदेशों की अवहेलना, पुलिस तंत्र की संस्थागत विफलता अथवा पुनरीक्षण याचिकाकर्ता की गलती से जुड़े सभी उल्लेख हटाए जाएंगे और इन्हें आरोपों की सत्यता पर किसी निष्कर्ष के रूप में नहीं माना जाएगा।















