नई दिल्ली, 31 जुलाई।
परीक्षा में होने वाली धांधली और पेपर लीक जैसी गंभीर घटनाओं पर नकेल कसने के लिए अब त्वरित अदालत यानी फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य ऐसे मामलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा सुनिश्चित करना है। नई व्यवस्था के तहत इस प्रकार के संगठित अपराधों की सुनवाई सर्वोच्च प्राथमिकता पर की जाएगी ताकि तय समयसीमा के भीतर जांच पूरी हो सके और दोषियों को कड़ी सजा मिल सके।
उच्चतम न्यायालय ने भी बीते वर्ष नीट परीक्षा के दौरान सामने आए मामलों की सुनवाई करते हुए इस बात को माना था कि पर्चे लीक हुए थे, हालांकि पूरे तंत्र के प्रभावित होने के सबूत न मिलने पर दोबारा परीक्षा का आदेश नहीं दिया गया था। इसके बाद सीबीआई द्वारा देश के कई राज्यों में लगातार छापेमारी करते हुए आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए गए हैं, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि नई अदालती व्यवस्था आने से न्याय प्रक्रिया में तेजी आएगी।
















