रांची, 31 जुलाई।
झारखंड उच्च न्यायालय ने महादेव उरांव द्वारा प्रस्तुत अवमानना याचिका पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए न सिर्फ उसे खारिज कर दिया, बल्कि पूर्व में दिए गए आदेश को भी निरस्त कर दिया है। अदालत की इस कड़ी कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान तथ्यों को छुपाना और अदालत को भ्रमित करना बहुत गंभीर अपराध है, जिसके चलते याचिकाकर्ता के ऊपर भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया गया है।
न्यायालय की इस सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि जमीन और संपत्ति से जुड़े इस विवाद में करोड़ों रुपये के लेनदेन की जानकारी छिपाई गई थी, जिसके कारण प्रभावित लोगों को बड़ी राहत दी गई है। इस पूरे प्रकरण में प्रशासनिक कार्रवाई के विरुद्ध खड़े हुए स्थानीय निवासियों ने अपने पक्ष रखे थे, और अब उच्च न्यायालय के इस फैसले से याचिकाकर्ता की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।















