इंदौर, 5 अगस्त।
मध्य प्रदेश के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारतीय मूल्यों पर आधारित है, जिसमें आध्यात्म और विज्ञान का प्रभावी समन्वय देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि यह नीति गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचार और शोध को बढ़ावा देने के साथ देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
मंत्री परमार एसजीएसआईटीएस परिसर में आयोजित प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के ‘उद्भव-2026’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह संस्थान देश के प्रतिष्ठित तकनीकी शिक्षण संस्थानों में शामिल है और यहां के विद्यार्थियों ने देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को संस्थान का गौरव बढ़ाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री इंदरसिंह परमार और अन्य अतिथियों ने लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा का अनावरण भी किया। इस अवसर पर संस्थान के पूर्व छात्र पद्मश्री प्रो. डी.बी. फाटक, यशवंत राव होलकर तृतीय, नंदू सक्सेरिया और नितेश पुरोहित सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
मंत्री परमार ने कहा कि एसजीएसआईटीएस अगले वर्ष अपनी स्थापना के 75 वर्ष पूरे करेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भागीदारी निभाना भी है।
उन्होंने कहा कि संस्थान में तकनीकी शिक्षा के साथ अनुशासन, जीवन मूल्य और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना भी विकसित की जाती है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की प्राचीन विरासत और ज्ञान को समझना और आगे बढ़ाना आवश्यक है।
मंत्री परमार ने कहा कि मध्य प्रदेश में हिंदी के साथ तमिल, तेलुगु, गुजराती, पंजाबी सहित अन्य भारतीय भाषाओं में भी अध्ययन की व्यवस्था की जाएगी, ताकि विद्यार्थियों को दूसरे राज्यों में शिक्षा और रोजगार के दौरान सुविधा मिल सके। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाएं राष्ट्र को जोड़ने का कार्य करती हैं।
कार्यक्रम में यशवंत राव होलकर तृतीय ने लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के योगदान पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को मन लगाकर अध्ययन करने की प्रेरणा दी। वहीं पद्मश्री प्रो. डी.बी. फाटक ने संस्थान की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में मंत्री परमार ने झाबुआ पॉलिटेक्निक कॉलेज के इंटर्नशिप कर रहे विद्यार्थियों से संवाद किया और उन्हें प्रमाणपत्र वितरित किए। इस दौरान संस्थान में संचालित सामुदायिक पाठ्यक्रम और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों की जानकारी भी साझा की गई।














