नई दिल्ली, 5 अगस्त।
उत्तर रेलवे ने दिल्ली मंडल में डफरिन ब्रिज और मिठाई पुल के नीचे स्थित ओवरहेड उपकरण (ओएचई) के डेड ज़ोन से जुड़ी वर्षों पुरानी परिचालन समस्या का स्थायी तकनीकी समाधान विकसित कर लिया है। इस सुधार से दिल्ली क्षेत्र में ट्रेनों के संचालन की विश्वसनीयता, समयपालन और गति में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।
रेलवे के अनुसार इन दोनों स्थानों पर पुलों के नीचे सीमित ऊंचाई (हेडरूम) होने के कारण 50 मीटर से अधिक लंबे ओएचई डेड ज़ोन बनाए गए थे। इन क्षेत्रों से गुजरते समय कई बार विद्युत लोकोमोटिव की बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती थी, जिससे ट्रेनें बीच रास्ते में रुक जाती थीं और देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में परिचालन प्रभावित होता था।
समस्या के स्थायी समाधान के लिए उत्तर रेलवे ने अप्रैल 2026 से मिशन मोड में कार्य शुरू किया। इस दौरान अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) तथा नॉर-ब्रेमसे इंडिया लिमिटेड (KBIL) के सहयोग से विस्तृत तकनीकी जांच और मूल कारणों का विश्लेषण किया गया।
जांच में पता चला कि वैक्यूम सर्किट ब्रेकर (VCB) की स्विचिंग के दौरान उत्पन्न वोल्टेज सर्ज, CCB 2.0 ब्रेकिंग सिस्टम से लैस इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में अनचाहे आपातकालीन ब्रेक लगने का कारण बन रहे थे। इसके बाद केबीआईएल ने इलेक्ट्रॉनिक विजिलेंस कंट्रोलर (EVC) के लिए उन्नत सॉफ्टवेयर विकसित किया, जिससे इस समस्या का प्रभावी समाधान संभव हुआ।
उत्तर रेलवे ने बताया कि अब तक भारतीय रेल के 600 से अधिक इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में यह नया सॉफ्टवेयर स्थापित किया जा चुका है। जिन इंजनों में यह अपग्रेड किया गया है, उनमें दोबारा ऐसी समस्या सामने नहीं आई है। शेष लोकोमोटिव में भी चरणबद्ध तरीके से सॉफ्टवेयर अपग्रेड का कार्य जारी है।
रेलवे का कहना है कि इस तकनीकी नवाचार से ट्रेनों के अनावश्यक ठहराव में कमी आई है, समयपालन बेहतर हुआ है और दिल्ली मंडल में रेल संचालन अधिक सुचारु एवं विश्वसनीय बन गया है। यह उपलब्धि भारतीय रेल की तकनीकी उन्नयन और यात्रियों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।














