शिमला, 05 अगस्त।
पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने संसद की कार्यवाही में लगातार बढ़ते व्यवधान पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सदन में गंभीर चर्चा की जगह हंगामे का माहौल अधिक देखने को मिल रहा है। उनका कहना है कि संसद में 'काम नहीं तो वेतन नहीं' का सिद्धांत लागू किया जाना चाहिए।
बुधवार को जारी अपने बयान में उन्होंने कहा कि कई बार पूरा संसदीय सत्र बिना किसी सार्थक चर्चा के समाप्त हो जाता है। अनेक महत्वपूर्ण विधेयक भी पर्याप्त बहस के अभाव में पारित हो जाते हैं। उनके अनुसार देशभक्तों के त्याग और बलिदान से प्राप्त लोकतांत्रिक व्यवस्था आज कमजोर होती दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि संसद के संचालन पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद जब सदन में कार्य नहीं हो पाता और केवल नारेबाजी व हंगामा होता है, तब भी सांसदों को वेतन और भत्ते मिलते रहते हैं। उन्होंने मांग की कि जिन सांसदों के कारण कार्यवाही बाधित होती है और कामकाज प्रभावित होता है, उन्हें उस अवधि का वेतन और भत्ता नहीं मिलना चाहिए।
शांता कुमार ने व्यंग्य करते हुए कहा कि संसद केवल दो मौकों पर पूरी तरह शांत दिखाई देती है। पहला किसी बड़े नेता के निधन पर शोक प्रस्ताव के समय और दूसरा सांसदों के वेतन तथा भत्तों में वृद्धि से जुड़े विधेयक के दौरान। उन्होंने कहा कि इन दोनों अवसरों के अलावा कई बार संसद "शोर सभा" का रूप ले लेती है।
उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और नेताओं से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने तथा संसद की गरिमा और परंपराओं को बनाए रखने के लिए गंभीर प्रयास करने की अपील भी की।














