देहरादून, 5 अगस्त।
विश्व संस्कृत दिवस से पहले उत्तराखंड सरकार ने संस्कृत के वैश्विक प्रचार-प्रसार और भारतीय ज्ञान परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने की दिशा में नई पहल शुरू की है। इसी क्रम में नेपाल और इंडोनेशिया के साथ संस्कृत शिक्षा, अनुसंधान और सांस्कृतिक सहयोग को विस्तार देने के प्रयास तेज किए गए हैं।
प्रदेश के संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने नई दिल्ली में नेपाल और इंडोनेशिया के दूतावासों में अलग-अलग बैठकें कर संस्कृत अनुसंधान, शिक्षक एवं छात्र आदान-प्रदान, संयुक्त शोध और शैक्षणिक सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की।
नेपाल दूतावास में कार्यवाहक राजदूत डॉ. सुरेन्द्र थापा से मुलाकात के दौरान उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय और नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (एमओयू), संयुक्त अनुसंधान और संस्कृत अध्ययन को बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श हुआ। डॉ. थापा ने उत्तराखंड सरकार की पहल की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों के सहयोग से संस्कृत शिक्षा और शोध को नई गति मिलेगी।
दीपक कुमार ने बताया कि राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह संस्कृत को सरल और व्यवहारिक भाषा मानते हैं तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के माध्यम से इसके अध्ययन और शुद्ध उच्चारण को बढ़ावा देने पर जोर देते रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार संस्कृत संरक्षण के लिए लगातार नवाचार कर रही है और राज्य के सभी 13 जिलों में 13 संस्कृत ग्राम स्थापित किए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि 28 अगस्त को विश्व संस्कृत दिवस के अवसर पर उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, संस्कृत संस्थान, संस्कृत ग्रामों और गुरुकुलों में संगोष्ठियां, व्याख्यान, कार्यशालाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य आधुनिक समाज में संस्कृत की उपयोगिता को रेखांकित करना है।
इसी क्रम में इंडोनेशिया के कार्यवाहक राजदूत युधो सासोंगको से हुई बैठक में दोनों देशों के बीच संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दीपक कुमार ने कहा कि उत्तराखंड में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया गया है और राज्य में संस्कृत आयोग के गठन की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि इंडोनेशियाई भाषा में आज भी बड़ी संख्या में संस्कृत मूल के शब्द प्रचलित हैं, जो दोनों देशों के प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों का प्रमाण हैं। उन्होंने उत्तराखंड और इंडोनेशिया के विश्वविद्यालयों के बीच समझौता ज्ञापन कर संयुक्त अनुसंधान, छात्र-शिक्षक आदान-प्रदान और भारतीय ज्ञान प्रणाली पर दीर्घकालिक सहयोग विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा।














