देहरादून, 25 सितंबर।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) ने उत्तराखंड के दूरस्थ और दुर्गम पहाड़ी गांवों तक सड़क पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सड़क संपर्क बढ़ने से इन क्षेत्रों में आवागमन के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और पर्यटन गतिविधियों को भी गति मिली है। योजना अब चौथे चरण में प्रवेश कर चुकी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार दूरदराज के सभी गांवों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। पीएमजीएसवाई की सड़कों से विद्यार्थियों का आवागमन आसान हुआ है, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में मदद मिल रही है और किसानों के लिए अपनी उपज मंडियों तक ले जाना सुगम हुआ है।
राज्य में पीएमजीएसवाई के तीन चरणों के तहत 11,595 करोड़ रुपये की लागत से 2,826 सड़कों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इनकी कुल लंबाई 21,915 किलोमीटर है और 1,860 गांवों को इसका लाभ मिला है। केंद्र सरकार के जुलाई 2026 तक के आंकड़ों में भी उत्तराखंड में 21,902 किलोमीटर पीएमजीएसवाई सड़कें पूरी होने और 1,860 बस्तियों के जुड़ने का उल्लेख है।
पीएमजीएसवाई के चौथे चरण के पहले चक्र में प्रदेश के 309 गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। इस चरण में 1,707 करोड़ रुपये की लागत से 1,228.20 किलोमीटर लंबी 184 सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। मार्च 2026 के केंद्र सरकार के आंकड़ों में भी उत्तराखंड के लिए 184 सड़कें और 1,228.20 किलोमीटर लंबाई स्वीकृत होने की जानकारी दी गई थी।
पहले चक्र में पौड़ी गढ़वाल के 68 गांवों को सड़क सुविधा मिलेगी। अल्मोड़ा और टिहरी के 47-47, बागेश्वर के 35, पिथौरागढ़ के 25, नैनीताल और उत्तरकाशी के 24-24, चमोली के 17, देहरादून और रुद्रप्रयाग के 10-10 तथा हरिद्वार के दो गांव इसमें शामिल हैं।
पीएमजीएसवाई-चतुर्थ चरण के प्रस्तावित आंकड़ों के अनुसार पिथौरागढ़ में 249 गांवों के लिए 1,819.60 किलोमीटर, अल्मोड़ा में 221 गांवों के लिए 1,395.50 किलोमीटर और पौड़ी में 185 गांवों के लिए 1,227.80 किलोमीटर सड़क का प्रावधान है।
चमोली में 175 गांवों के लिए 996.15 किलोमीटर और टिहरी में 168 गांवों के लिए 941.50 किलोमीटर सड़क प्रस्तावित है। उत्तरकाशी में 112 गांवों के लिए 721.99 किलोमीटर, रुद्रप्रयाग में 111 गांवों के लिए 469.20 किलोमीटर और बागेश्वर में 101 गांवों के लिए 569.82 किलोमीटर सड़क का प्रस्ताव है।
नैनीताल में 67 गांवों के लिए 399.55 किलोमीटर, देहरादून में 52 गांवों के लिए 390 किलोमीटर, चंपावत में 39 गांवों के लिए 387.30 किलोमीटर, ऊधमसिंह नगर में नौ गांवों के लिए 22.30 किलोमीटर और हरिद्वार में एक गांव के लिए 3.10 किलोमीटर सड़क प्रस्तावित है।












