श्योपुर, 25 सितंबर।
कूनो राष्ट्रीय उद्यान में प्रोजेक्ट चीता के चार वर्ष पूरे होने पर चीतों के संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। भारत में जन्मे चीता शावकों की जीवित रहने की दर 65 प्रतिशत दर्ज की गई है। अफ्रीकी देशों में यह औसत करीब 40 प्रतिशत बताई गई है। तीन चरणों में भारत लाए गए 29 चीतों में से 20 जीवित हैं और नौ की मौत हुई है।
कूनो में चीतों के प्रजनन और शावकों के संरक्षण के लिए निगरानी व्यवस्था को विशेष रूप से विकसित किया गया है। वनरक्षक और ट्रैकर, चौबीस घंटे कैमरों की निगरानी, उपग्रह कॉलर से मिलने वाली जानकारी और ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, मादा चीता और उसके शावकों को अनावश्यक रूप से परेशान न करने के लिए निगरानी में दूरी का ध्यान रखा जाता है। मादा के शिकार के लिए बाहर जाने पर सुरक्षित दूरी से शावकों की स्थिति पर नजर रखी जाती है।
कूनो प्रबंधन इस अनुभव के आधार पर एक मार्गदर्शिका तैयार करने की योजना बना रहा है। परियोजना के चार वर्ष बाद भारत में जन्मी चीता पीढ़ी अब संरक्षण प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।














