भोपाल, 06 अक्टूबर।
मध्य प्रदेश में चीता संरक्षण परियोजना का दायरा बढ़ाते हुए राज्य के कूनो नेशनल पार्क और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य के बाद अब सागर जिले के बुंदेलखंड अंचल स्थित वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को चीतों का तीसरा नया आशियाना मिलने जा रहा है, जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के समापन अवसर पर एक नर चीता 'थेलो' और मादा चीता 'सीसीबी-3' को खुले जंगल में छोड़ेंगे। पूर्व में नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य के रूप में चर्चित और सागर, दमोह तथा नरसिंहपुर जिलों में लगभग 2,339 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला यह टाइगर रिजर्व प्रदेश का सबसे बड़ा बाघ आवास क्षेत्र भी है, जिसे चीतों की अनुकूल बसाहट के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। इन दोनों चीतों को कूनो नेशनल पार्क से यहां लाया गया है, और इसके लिए रिजर्व के भीतर करीब 439 हेक्टेयर क्षेत्र में आधुनिक बाड़ों (बोमा) व सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि ये वन्यजीव नए परिवेश में आसानी से ढल सकें।
प्रशासन और वन विभाग का मानना है कि बुंदेलखंड की इस धरती पर चीतों के कदम पड़ने से क्षेत्रीय पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा, जिससे होटल, रिसॉर्ट, होमस्टे, गाइड, स्थानीय हस्तशिल्प और वाहन चालकों समेत ग्रामीण अर्थव्यवस्था के हर मोर्चे पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए चीतों के साथ शुरू किए गए इस महत्वाकांक्षी पुनर्वास कार्यक्रम के तहत अब देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 60 हो चुकी है, जिसमें कूनो में जन्मी पांच नए शावकों के साथ बोत्सवाना व दक्षिण अफ्रीका से लाई गई व स्थानीय स्तर पर जन्मी प्रजातियां शामिल हैं। इस बहुप्रतीक्षित विमोचन के बाद कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या 54 रह जाएगी, जबकि गांधी सागर अभयारण्य में पहले से ही प्रभास, पावक, धीरा और राधा जैसे चीते मौजूद हैं, जिससे भारत में वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन का यह ऐतिहासिक अध्याय और अधिक मजबूत हो रहा है।














