पिछले दिनों एक नए-नवेले साहब ने अपने जन्मदिन पर पार्टी रखी। उसमें अपने बैच के सभी साथियों को आमंत्रित किया। पार्टी तो खूब जमी, संगीत की महफिल भी जमी, लेकिन साहब की पहले जिनसे जमती थी, उनकी जगह किसी बाहरी से कुछ ज्यादा ही जम रही है। ऐसा पार्टी में उन्हें मिल रही तवज्जो से अंदाजा लगाया जा सकता है। मामला मालवा क्षेत्र के एक बड़े शहर का है।














