संगठन और सत्ता के नवागत पदाधिकारियों के प्रथम राजधानी आगमन पर भाजपा कार्यालय में बैठक हुई। बैठक में एक वरिष्ठ माननीय को पीछे की पंक्ति से सम्मानपूर्वक आगे बुलाकर अपने साथ खड़ा किया गया। बस फिर क्या था, चर्चा का बाजार गर्म हो गया। जानकारों का कहना है कि माननीय को अपनी ताकत दिखाने के लिए भाषण देने की जरूरत नहीं पड़ती, कभी-कभी कुर्सी की कतार भी काफी होती है।














