मध्यप्रदेश में हुए बड़े संगठनात्मक बदलाव के बाद उम्मीद जगी है कि अब संगठन में सबको साथ लेकर चलने की कवायद होगी। लेकिन नवागत पदाधिकारियों के सामने चुनौती छोटी नहीं है। सीनियरों को सम्मान देना है, युवाओं को आगे बढ़ाना है और दोनों के बीच संतुलन भी बनाए रखना है। राजनीति में यह काम रस्सी पर चलने से कम नहीं होता। अब देखना यह है कि नए पदाधिकारी सबको साधते हैं या साधते-साधते कोई नया समीकरण ही तैयार हो जाता है।














