प्रदेश के कुछ संभागों में बड़े साहबों की पदस्थापना होनी है। फिलहाल छोटे साहब प्रभार की कुर्सी पर पूरे जलवे के साथ विराजमान हैं। लेकिन जैसे ही बड़े साहब की पदस्थापना की चर्चा छिड़ती है, मुख्यालयों में कहीं खुशी तो कहीं गम के नजारे दिखाई देने लगते हैं।
बड़े साहबों को अपनी पदस्थापना की उम्मीद में खुशी है, तो प्रभार वाले साहबों को कुर्सी और जलवे के कम होने की आहट बेचैन कर रही है। यानी एक की पदस्थापना की खबर, दूसरे के लिए प्रभार की विदाई का संदेश बन रही है।














