कप्तान साहब ने अपने जूनियर को काम करने के गुर सिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। साहब ने सोचा होगा कि शिष्य तैयार हो रहा है, लेकिन अब जब चेला आगे निकलता दिखाई दिया तो गुरु को भी अपने पुराने दिनों की याद आने लगी। शायद तभी साहब अब यह कहते सुने जा रहे हैं कि उन्हें क्या पता था, गुरु गुड़ रह जाएगा और चेला शक्कर हो जाएगा।














