कुछ दिन पहले एक कप्तान साहब का जन्मदिन बड़े धूमधाम से मनाने की तैयारी थी। मातहतों ने आयोजन को भव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। केक से लेकर कार्यक्रम तक सब कुछ तय था, लेकिन तभी पड़ोसी जिले में संवेदनशील घटना हो गई। बस फिर क्या था, जन्मदिन की खुशियों पर ड्यूटी भारी पड़ गई और साहब को सजावट छोड़कर मैदान संभालने निकलना पड़ा। आखिर वर्दी में जन्मदिन से पहले जिम्मेदारी आती है।














