भोपाल, 03 अक्टूबर।
संरक्षण और आश्रय की जरूरत वाली बालिकाओं को सैकड़ों किलोमीटर दूर भोपाल भेजने की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की पहल की गई है। मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग से प्रदेश के हर संभाग में उपयुक्त संस्थाओं को ‘फिट फैसिलिटी’ के रूप में चिन्हित और मान्यता देने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। आयोग का कहना है कि जरूरतमंद बालिकाओं को उनके निकटतम संभाग में ही सुरक्षित आश्रय और संरक्षण मिलना उनके सर्वोत्तम हित में है। वर्तमान में प्रदेश के 12 जिलों में बालिकागृह संचालित हैं और ग्वालियर व चंबल संभाग में कोई शासकीय बालिकागृह नहीं है। इन क्षेत्रों की जरूरतमंद बालिकाओं को भोपाल के बालिकागृह भेजा जाता है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव को पत्र भेजकर किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 39(3) के तहत उपयुक्त संस्थाओं को ‘फिट फैसिलिटी’ घोषित करने की कार्रवाई करने को कहा है।
आयोग ने माना है कि विशेष परिस्थितियों वाली बालिकाओं, खासकर पॉक्सो अधिनियम के तहत पीड़ित, लैंगिक अपराध से प्रभावित या गर्भवती बालिकाओं को दूर भेजे जाने से मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक परेशानियां बढ़ सकती हैं। इससे न्यायिक प्रक्रिया, चिकित्सकीय जांच, परामर्श और परिवार से संपर्क में भी कठिनाई आती है। आयोग के अनुसार, निकटतम संभाग में आश्रय मिलने से बालिकाएं अपने परिचित सामाजिक वातावरण से पूरी तरह अलग होने से बच सकेंगी और स्थानीय स्तर पर जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराना आसान होगा। इसके लिए विभाग से संभागीय संयुक्त संचालकों, जिला कार्यक्रम अधिकारियों और अन्य सक्षम अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी करने की अपेक्षा की गई है। आयोग ने ‘फिट फैसिलिटी’ के चयन, मान्यता, संचालन, निरीक्षण और गुणवत्ता मानकों के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया तय करने पर भी जोर दिया है, ताकि पूरे प्रदेश में व्यवस्था एक समान रहे और बालिकाओं की सुरक्षा, संरक्षण व पुनर्वास से जुड़ी सेवाओं की गुणवत्ता पर निगरानी बनी रहे।














