भोपाल, 17 अक्टूबर।
भोपाल का न्यू मार्केट केवल बाजार नहीं, एक एहसास है। यहां करीब 1200 दुकानदार हैं और रोज 50 हजार लोग आते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां चलने, निकलने और आग लगने पर फंस जाने का डर बढ़ा है।
नगर निगम ने दुकानों के बाहर पीली लाइन खींचकर सामान उसके भीतर रखने का निर्देश दिया है। पहले भी लाल और पीली पट्टियां बनाई गई थीं, लेकिन नियमों का पालन नहीं हुआ। सवाल यह है कि दस फीट की दुकान सौ फीट तक कब्जा क्यों करे और इसे अपना हक क्यों बताए?
दुकानदार बोर्ड, स्टैंड, डमी और सामान सड़क तक सजा देते हैं। नतीजा यह है कि फुटपाथ खत्म हो जाते हैं और एंबुलेंस तथा दमकल के लिए रास्ता नहीं बचता। हाल ही में न्यू मार्केट में हुई आगजनी ने इस समस्या की गंभीरता उजागर कर दी। बड़ा हादसा हो जाता तो जिम्मेदारी किसकी होती?
नगर निगम ने हॉकर्स को टीटी नगर स्टेडियम के पास हाट बाजार में स्थानांतरित करने और नो व्हीकल जोन खाली रखने का निर्णय लिया है। यह कार्रवाई किसी को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा के लिए है।
बैठक में सभी व्यापारी संगठनों को बुलाना उचित होता। सबकी बात सुनना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इससे अतिक्रमण को जायज नहीं ठहराया जा सकता। पीली लाइन दुकान की सीमा तय करती है, जहां दुकानदार का अधिकार समाप्त होता है और जनता का रास्ता शुरू होता है।
नगर निगम को पीली लाइन का सख्ती से पालन कराना चाहिए और उल्लंघन पर जुर्माना लगाना चाहिए। हॉकर्स को पानी, बिजली और शौचालय जैसी सुविधाओं से युक्त व्यवस्थित स्थान मिले। व्यापारी भी बाहर कब्जा करने के बजाय दुकान के भीतर बेहतर व्यवस्था बनाएं।
न्यू मार्केट को तय करना होगा कि वह कब्जे वाला बाजार बनेगा या जनता का। पीली लाइन केवल रंग नहीं, सुरक्षित आवागमन का वादा है। बाजार किसी की जागीर नहीं, जनता की सुविधा का स्थान है।













