नई दिल्ली, 23 अक्टूबर।
प्रवासी पक्षियों की हैरतअंगेज यात्रा का एक और मुकाम पूरा हो गया है। सैटेलाइट टैग से लैस दो अमूर फाल्कन 'अपापांग' और 'अलंग' उत्तर-पूर्वी चीन में अपने प्रजनन स्थलों से लगभग 11 दिन पूर्व रवाना होकर मणिपुर पहुंच चुके हैं।
एशिया और अफ्रीका के भूभागों को नापते हुए अपनी इस यात्रा में इन पक्षियों ने 23 देशों की सीमाओं को लांघा है। भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों द्वारा नवंबर 2025 में सैटेलाइट ट्रांसमीटर लगाए जाने के बाद से उनकी सालभर की ट्रैकिंग और मणिपुर वापसी का यह बेहद महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर दोनों पक्षियों की तस्वीरें साझा करते हुए इस बात की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि ये अमूर फाल्कन अब मणिपुर के तामेंगलोंग जिले की पहाड़ियों में स्थित विशेष ठिकानों पर अगले दो से तीन हफ्तों तक विश्राम करेंगे।
स्थानीय निवासी हर साल इन मेहमान पक्षियों के आगमन का उत्सुकता से इंतजार करते हैं और उनकी देखरेख तथा सुरक्षा में बढ़-चढ़कर सहयोग करते हैं।
इस पड़ाव के दौरान ये पक्षी दीमकों का शिकार कर अपने शरीर में वसा का संचय करेंगे। यह संचित ऊर्जा उनकी आगामी लंबी और कठिन उड़ान के लिए ईंधन का काम करेगी।
मणिपुर से अपनी आगे की यात्रा शुरू करने के बाद इन्हें सोमालिया तक लगभग 6,000 किलोमीटर का सफर तय करना होगा। इस दौरान वे करीब छह दिनों तक लगातार उड़ सकते हैं, जिसमें अरब सागर के ऊपर से गुजरने वाली 3,000 किलोमीटर की खतरनाक यात्रा भी शामिल है।

उल्लेखनीय है कि मणिपुर वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान ने संयुक्त रूप से पिछले वर्ष नवंबर 2025 में 'मणिपुर अमूर फाल्कन ट्रैकिंग प्रोजेक्ट' की शुरुआत की थी।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य इन अद्भुत पक्षियों के प्रवास पथ, उनके व्यवहार और लंबी दूरी की उड़ानों के रहस्यों को समझना है। इससे शोधकर्ताओं को उनके ठहराव और समुद्री रास्तों की सटीक जानकारी मिल रही है।
परियोजना के दूसरे चरण में तामेंगलोंग के चिउलुआन रोस्टिंग केंद्र से तीन अमूर फाल्कन पक्षियों को सैटेलाइट ट्रांसमीटर लगाकर आजाद किया गया था। इनमें 'अपापांग' नाम का नर पक्षी और 'आहू' तथा 'अलांग' नाम की दो मादा पक्षी शामिल थीं।
इनकी गतिविधियों का अध्ययन कर वैज्ञानिकों ने अंतरमहाद्वीपीय यात्रा से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्र की हैं। अब अपापांग और अलांग की सुरक्षित वापसी से शोध को आगे बढ़ाने में बड़ी मदद मिलेगी।
छोटे आकार वाले अमूर फाल्कन अपनी लंबी दूरी की प्रवास यात्राओं के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं। मौसम में बदलाव और भोजन की खोज में ये हजारों किलोमीटर का साहसिक सफर तय करते हैं।
चीन से शुरू होकर एशिया और अफ्रीका तक फैलने वाली इनकी यह यात्रा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वन्यजीव संरक्षण तथा पक्षी निगरानी के महत्व को रेखांकित करती है।
इस पूरे संरक्षण अभियान में तामेंगलोंग के स्थानीय समुदायों की भागीदारी मिसाल बनी हुई है। ग्रामीणों का यह आत्मीय प्रयास दिखाता है कि सामुदायिक सहयोग से किस तरह प्रवासी पक्षियों को सुरक्षित वातावरण मुहैया कराया जा सकता है।














