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संपादकीय
24 Oct, 2026

एसबीआई में सेंध, भरोसे की दीवार में दरार तीन हजार आठ सौ सत्तानवे नाम नहीं, भरोसे पर चोट

भारतीय स्टेट बैंक में 3,897 ग्राहकों की निजी जानकारी लीक होने के मामले ने साइबर सुरक्षा, संभावित वित्तीय धोखाधड़ी और बैंक की जवाबदेही को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर।

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में ग्राहकों की निजी जानकारी लीक होने का मामला केवल डेटा सुरक्षा की चूक नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के भरोसे पर चोट है। बैंक ने 3,897 ग्राहकों की पहचान से जुड़ी जानकारी लीक होने की बात स्वीकार की है। शुरुआती जांच में करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड खंगाले गए, जबकि हैकर समूह ने 2,722 पीडीएफ फाइलें होने का दावा किया है। 16 अक्टूबर को साइबर सुरक्षा एजेंसियों से अलर्ट मिलने के बाद बैंक ने जांच शुरू कराई। सवाल है कि बाहरी एजेंसियों के अलर्ट से पहले बैंक की अपनी निगरानी व्यवस्था को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?

लीक जानकारी में नाम, मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, ईमेल, घर का पता, शाखा का विवरण, ग्राहक पहचान संख्या और ऋण संबंधी रिकॉर्ड शामिल बताए गए हैं। जालसाजी की दुनिया में ये जानकारियां बेहद अहम हैं। इनके आधार पर ठग ग्राहकों को फोन करके बैंक अधिकारी होने का भरोसा दिला सकते हैं और ओटीपी या पासवर्ड हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। इस तरह डेटा लीक वित्तीय धोखाधड़ी का रास्ता खोल सकता है।

एसबीआई गरीबों, किसानों, मजदूरों, पेंशनभोगियों और जनधन खाताधारकों के लिए भरोसे का प्रतीक है। ऐसे में ग्राहकों की जानकारी डार्क वेब तक पहुंचने की खबर डिजिटल बैंकिंग की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। पहले भी बैंकों में डेटा सुरक्षा से जुड़ी घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन हर बार जांच की घोषणा के बाद ग्राहकों को स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाता।

बैंकिंग व्यवस्था में तीसरी कंपनियों की कमजोर सुरक्षा, कर्मचारियों की गतिविधियों की अपर्याप्त निगरानी और असुरक्षित सर्वर जैसी खामियां डेटा लीक का कारण बन सकती हैं। इन पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। बाहरी कंपनियों का नियमित सुरक्षा ऑडिट हो, संवेदनशील जानकारी एन्क्रिप्ट की जाए और डेटा तक पहुंच की निगरानी मजबूत बनाई जाए। ग्राहकों को भी समय रहते स्थानीय भाषा में चेतावनी दी जानी चाहिए।

सबसे जरूरी है जवाबदेही। डेटा लीक की सूचना मिलने पर ग्राहकों को स्पष्ट जानकारी दी जाए और लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान हो। केवल यह कहना पर्याप्त नहीं कि मुख्य बैंकिंग सेवाओं पर असर नहीं पड़ा। तकनीकी सेवाएं चालू रहना और ग्राहकों का भरोसा सुरक्षित रहना दो अलग बातें हैं।

एसबीआई को समझना होगा कि उसके पास ग्राहकों का पैसा ही नहीं, उनकी उम्मीदें भी जमा हैं। इस भरोसे की सुरक्षा ही असली बैंकिंग है।

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